आर्थिक तंगी और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद कैथल के हाबड़ी गांव निवासी हॉकी खिलाड़ी सुखविंद्र ने कड़ी मेहनत से मुकाम हासिल किया और अपनी पहचान बनाई। विदित हो कि सुखविंद्र चार भाई-बहनों में सबसे छोटा है और पिता मेहनत मजदूरी कर परिवार का लालन-पालन करते हैं।
सुखविंद्र बोले-अब परिवार के सपने को पूरा करने का कर रहे हैं प्रयास
खिलाड़ी सुखविंद्र ने बताया कि वह चार भाई-बहनों में सबसे छोटा हैं। उसके पिता देवीलाल मजदूरी कर अपने परिवार का गुजर बसर कर रहे हैं। उनकी माता कमला देवी का वर्ष 2019 में सड़क हादसे में निधन हो गया था। उसके एक साल बाद पिता को करंट लग गया, लेकिन विपरीत परिस्थितियों में भी उसने हॉकी को नहीं छोड़ा और कड़ी मेहनत तथा अभ्यास से खुद को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों के लिए तैयार किया। उसका कहना है कि अब वह अपने माता-पिता के सपने को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं।
कोच गुरबाज बोले-भारतीय टीम और सुखविंद्र पर है गर्व
सुखविंद्र के कोच गुरबाज सिंह का कहना है कि भारत की टीम ने फाइनल मुकाबले में पाकिस्तान को हराकर स्वर्ण पदक पर कब्जा किया है। भारतीय टीम और विशेष रूप से कैथल के खिलाड़ी सुखविंद्र पर हम सभी को गर्व है। इससे देश-विदेश में हाबड़ी गांव का नाम रोशन हुआ है। साथ ही सभी खेल प्रेमियों में खुशी की लहर है।
हाबड़ी हॉकी अकादमी के खिलाड़ी अज्ञयापाल, शुभम, हर्ष, कुदरत, शरणजीत सहित अन्य खिलाड़ियों ने भारत की जीत पर खुशी का इजहार करते हुए खिलाड़ी सुखविंद्र को शुभकामनाएं दी। वहीं, जिला खेल अधिकारी सुमन मलिक ने कहा कि ये गर्व की बात है कि कैथल के खिलाड़ी सुखविंद्र ने देशभर में हाबड़ी गांव का नाम रोशन किया है।
12वीं कक्षा के छात्र सुखविंदर ने कहा कि उन्होंने हॉकी खेल की शुरुआत वर्ष 2016 में की थी। वह तब से लगातार गांव में बने हॉकी ग्राउंड पर कड़ा अभ्यास करते रहे हैं। इससे पहले भी वे सब जूनियर नेशनल प्रतियोगिता में रजत पदक जीत चुके हैं। इसके अलावा वह चार बार राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक हासिल कर चुके हैं।