जिले में बने पैक्सो में संबंधित क्षेत्र की लागत के अनुसार डीएपी खाद नहीं पहुंच रही है। किसानों को जैसे-तैसे काम चलाने के लिए निजी कंपनियों का सहारा लेना पड़ रहा है।
जब ग्रामीण क्षेत्र में स्थित पैक्सो में किसानों को डीएपी खाद नहीं मिलता है तो उन्हें शहरों का रुख करना पड़ रहा है। पैक्सो में कृभको एजेंसी का खाद तो पहुंच चुका है, लेकिन क्षेत्र की मांग के अनुसार यह पर्याप्त नहीं है। इफ्को का रैक अर्थात खाद की मालगाड़ी इस बार जिले में अभी तक नहीं पहुंची है। किसान पुराने स्टॉक और निजी कंपनियों से खाद लेकर काम चला रहे हैं।
कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में इस बार जिले में गेहूं की फसल की बीजाई 1 लाख 73 हजार से ज्यादा हेक्टेयर रकबे में होनी है। ऐसे में खाद की लागत भी करीब 20 हजार टन होनी है। कुल लागत में से करीब 30 प्रतिशत खाद की इस बार कमी बनी हुई है।
खाद विक्रेता दीपक ने बताया कि दाम महंगे होने के कारण कंपनियां भी खाद पूरी तरह से नहीं खरीद पा रही हैं। खाद की सप्लाई विदेशों से ही आती है। इस बार दाम भी काफी बढ़ गए हैं। कंपनियां नहीं चाहती हैं कि उन्हें किसी प्रकार का नुकसान हो। उनके पास जो किसान आ रहे हैं, उन्हें निजी कंपनियों का खाद उपलब्ध करवाया जा रहा है।
किसान हरजीत सिंह ने बताया कि जब पैक्सो में खाद पूरा नहीं मिलता तो निजी विक्रेताओं के पास जा रहे हैं। वर्तमान हालात को देखते हुए उनके पास भी कमी होने के आसार हैं। काफी विक्रेता पुराने स्टॉक के साथ काम चला रहे हैं। सरकार को जल्द से जल्द किसानों को खाद उपलब्ध करवाना चाहिए।
प्रगतिशील किसान सुधीर मिड्ढा ने कहा कि सीवन व आस पास के सब्जी उत्पादक क्षेत्र में सैकड़ों एकड़ में आलू, मटर, गाजर, मूली व खीरा सहित अन्य सब्जियों की काश्त की जाती है। सब्जियों की बिजाई के समय डीएपी खाद की आवश्यकता होती है, लेकिन इस समय खाद पर्याप्त नहीं है। इससे किसानों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कोऑपरेटिव सोसायटी के माध्यम से अधिक से अधिक खाद किसानों को उपलब्ध करवाया जाए।
उप कृषि निदेशक डॉ. कर्मचंद ने कहा कि जिले में यूरिया खाद तो पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है, लेकिन डीएपी की थोड़ी कमी है। सप्लाई में देरी के कारण यह दिक्कत आई है। निजी कंपनियों का खाद जिले में उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा जल्द से जल्द एजेंसी का खाद मंगवाने का प्रयास किया जा रहा है।