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Kaithal News: बाबा राजपुरी ने की तपस्या तो मां हिंगलाज ने प्रसन्न होकर दिए थे दर्शन

Wed, 22 Mar 2023 12:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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कैथल। पुराना अस्पताल के समीप स्थित बड़ी देवी मंदिर करीब 700 साल पुराना है। ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर की स्थापना गांव बाबा लदाना के महंत बाबा राजपुरी ने की थी। बाबा राजपुरी ने मां के दर्शन पाने के लिए मंदिर के स्थान पर तपस्या की थी। इसके बाद मां हिंगलाज ने बाबा राजपुरी को तपस्या से प्रसन्न हो यहां विराजमान होने का वचन दिया था। गौरतलब है कि पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में मां हिंगलाज शक्तिपीठ है।
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मंदिर के महंत हीरा पुरी ने बताया कि जब बाबा राजपुरी ने यहां मां को प्रसन्न के लिए तपस्या की तो मां के दर्शनों के बाद बाबा ने उनसे यहां पर विराजमान होने का आग्रह किया। तब मां ने उनसे कहा था कि वे इस स्थान पर मेरे मंदिर की स्थापना करें, ताकि श्रद्धालुओं की हर मनोकामना पूरी हो सके। इसके बाद महंत ने यहां श्री बड़ी देवी माता के नाम से मंदिर स्थापित किया। गांव बाबा लदाना स्थित बाबा राजपुरी मठ की भी काफी मान्यता है। गांव बाबा लदाना में बाबा राजपुरी के मठ पर दशहरा पर्व पर तीन दिन तक विशाल मेला लगता है। यहां पर दूध चढ़ाने की विशेष परंपरा है।

संतान की होती प्राप्ति ः पुजारी पंडित शिव चरण शास्त्री ने बताया कि मंदिर में नवरात्र पर्व पर विशेष पूजा-अर्चना मंदिर में की जाती है। यहां नवरात्र में पूजा-अर्चना करने वाले भक्त जो भी मन्नतें मांगते हैं, वह पूर्ण होती है। सुबह व शाम को आरती होती है। मंदिर में श्रद्धालुओं की काफी आस्था है। नवरात्र पर्व के दिनों में यहां पर लगातार 41 दिन तक मां की ज्योति जलाने से संतान की प्राप्ति होती है।
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विशेषता ः श्री बड़ी देवी माता मंदिर को भव्य रूप दिया गया है। मंदिर के मुख्यद्वार को भी भव्य बनाया गया है। मंदिर छोटी ईंटों से बनाया गया है। देखने में काफी भव्य लगता है। सुंदरता देखते बनती है।

सुबह छह बजकर 24 मिनट से सात बजकर 31 मिनट तक रहेगा घट स्थापना का मुहूर्त
चैत्र नवरात्र बुधवार से शुरू हो रहे हैं। इस बार मां दुर्गा नौका पर सवार होकर आ रही है। यह सुख-समृद्धि का कारक माना जाता है। पंचांग के अनुसार, ऐसा योग पूरे 110 साल के बाद बन रहा है। इसके साथ ही पहले नवरात्र के दिन पांच राजयोग एक साथ बन रहे हैं। इसमें नीचभंग, बुधादित्य, गजकेसरी, हंस और शश योग बन रहा है। इस योग में विशेष पूजा-अर्चना करने से मां दुर्गा सभी मनकोमनाएं पूरी करेंगी। यह जानकारी हनुमान वाटिका मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित विशाल शर्मा ने दी है। उन्होंने बताया कि चैत्र नवरात्र पर ग्रहों का दुर्लभ संयोग बन रहा है।

यह है घट स्थापना का मुहूर्त

पंडित विशाल शर्मा ने बताया कि चैत्र नवरात्र पर्व के तहत घट स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह छह बजकर 24 मिनट से लेकर सुबह सात बजकर 31 मिनट तक रहेगा। इस समय ही घर के मंदिर में कलश स्थापित करें। शर्मा ने बताया कि घट स्थापना देवी शक्ति का आह्वान है इसलिए इसे गलत समय पर स्थापित न करें। शुभ मुर्हुत में ही कलश की स्थापना करें। कलश स्थापित करने से पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें। इसके बाद मंदिर की साफ-सफाई कर लें। फिर एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं और मां दुर्गा की तस्वीर या मूर्ति को स्थापित करें। साथ ही एक मिट्टी के पात्र में जौ बो दें। इस पात्र पर जल से भरा हुआ कलश स्थापित करें।
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