कैथल। हरियाणा रोडवेज में बसों का बेड़ा साल दर साल छोटा होता जा रहा है जबकि यात्रियों की संख्या बढ़ती जा रही है। पिछले दो वर्षों में कैथल डिपो को नई बसें नहीं मिली। इस दौरान 40 बसें कंडम हो गईं। इससे यात्रियों और विभाग की परेशानी बढ़ गई है।
जिले की आबादी को देखते हुए डिपो में 200 बसों की स्वीकृति विभाग ने दी थी लेकिन डिपो में 86 बसें ऑन रूट हैं। विभाग ने पिछले वर्ष 23 बसें किलोमीटर स्कीम के तहत रोडवेज के बेड़े में शामिल की हैं। कोरोना काल से पहले जनवरी 2020 में कैथल डिपो में 126 बसें थी। अब विभाग में केवल 86 बसें ही ऑन रूट हैं। इसके बाद भी डिपो में बसों की कमी नजर आ रही है। यात्रियों को शाम के समय बसें न मिलने से मायूस होकर लौटना पड़ता है। जिले के लगभग दस हजार यात्री रोजाना अलग-अलग रूटों पर बसों में सफर तय करते हैं।
कैथल से हरिद्वार, देहरादून, शिमला और जयपुर जैसे लंबे रूटों पर बसों का संचालन नहीं हो रहा है। बसों की कमी के चलते लगभग दो वर्ष से इन रूटों पर बस सेवा शुरू नहीं करवाई जा रही है। बसों की मांग के लिए मुख्यालय पत्र भेजा जा चुका है। अब तक एक भी बस नहीं मिली।
रोडवेज के जीएम अजय गर्ग ने बताया कि यात्रियों की संख्या में वृद्धि को देखते हुए सरकार और विभाग को अवगत करवाया गया है ताकि यात्रियों को असुविधा का सामना न करना पड़े। डिपो की ओर से बसों की मांग मुख्यालय भेजी गई है। उम्मीद है कि डिपो में जल्द नई बसें शामिल होंगी। डिपो में अभी बसें नहीं मिली हैं। संभावना जताई जा रही है कि मई तक डिपो को कुछ बसें नई जरूर मिल जाएगी।