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श्री राम के पूर्वज राजा खट्वांग की अराधना से उत्पन्न हुआ था खंडालवा मंदिर का शिवलिंग

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शकों और हुणों के हमलों से भी नहीं मिटा शिवलिंग का स्वरूप
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श्री राम के पूर्वज राजा खट्वांग की आराधना से उत्पन्न हुआ था खंडालवा मंदिर का शिवलिंग
निशीकांत शर्मा
कलायत। कलायत से सात किलोमीटर की दूरी पर बसे गांव खंडालवा स्थित शिवधाम पर हजारों वर्ष पुराना शिव मंदिर आकर्षण का केंद्र है। यहां कई किलोमीटर की दूरी तय कर महाशिवरात्रि के दिन लोग पूजा के लिए पहुंचते हैं। खंडालवा गांव की आबादी पर केवल मंदिर में रहने वाले साधु संत ही हैं। मंदिर एक टीले के ऊपर बना हुआ है और थोड़ी सी ही खुदाई में प्राचीन सभ्यता के अवशेषों के रूप में सिक्के, टूटे बर्तन, मूर्तियां तथा दीवारों से आत्मसात हो जाता है। ऐसी मान्यता है कि यहां किसी समय में कोई विकसित संस्कृति रही होगी, जिसे शकों तथा हुणों के हमलों ने तबाह कर दिया। समय के साथ साथ सभ्यताएं लुप्त होती गईं पर इस पौराणिक शिवलिंग का वजूद नहीं मिटा।
पुराणों के अनुसार इस मंदिर का संबंध भगवान राम के पूर्वज राजा खट्वांग से है। भगवान राम से 10 पीढ़ी पूर्व हुए उनके अग्रज राजा खट्वांग ने राजकाज त्याग कर यहां भगवान शिव की आराधना की थी और महाकांत ने इस स्थान पर उन्हें अपने नाम से पूजे जाने का आशीर्वाद दिया था। इसके बाद यहां भगवान शिव का शिवलिंग उत्पन्न हुआ। बाद में इस मंदिर का महाराजा पटियाला द्वारा जीर्णोद्धार किया गया। 1987 में महंत पुरुषोत्तम गिरी व बाबा रामगिरी के प्रयासों से मंदिर को भव्य स्वरूप दिया गया। पिछले कई वर्षों से महंत गिरिजा गिरी इस अलौकिक स्थान की सेवा में हैं। उनकी देखरेख में मंदिर प्रबंध समिति आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बेहतरीन प्रबंध कर रही है। मंदिर परिसर में भव्य हवन कुंड बना है। इसमें एक समय में सैकड़ों लोग हवन कर सकते हैं। दूर दराज से आने वाले यात्रियों के लिए दर्जनों कमरे मंदिर परिसर में ही बने हैं। परिसर में एक गौशाला भी बनी है जिसमें हजारों गाय मौजूद हैं। खटवांगेश्वर महादेव पर जलाभिषेक के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को गर्भगृह में घुसते ही अलौकिक शक्ति व तरंगों का अहसास होता है जो उनकी आस्था व श्रद्धा में और विश्वास बढ़ाता है।
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महाशिवरात्रि की तैयारियां की पूरी
कलायत। कलायत क्षेत्र में महाशिवरात्रि पर्व की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। मंदिरों को भव्य रूप से सजाया जा चुका है। कलायत के निकट गांव खडालवा में स्थित पौराणिक स्वयंभू शिव मंदिर को आकर्षक रूप से सजाये जाने व मेले की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा चुका है। मंदिर के मुख्य महंत गिरिजा गिरी व बलवंत सिंह ने बताया कि हजारों की संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने व खाने पीने की व्यवस्था हो चुकी है। महंत गिरिजा गिरी ने बताया कि त्रयोदशी को रात्रि 1 बज कर 15 मिंट पर महाकांत का जलाभिषेक आरंभ हो जाएगा। प्रबंध समिति में शामिल प्रधान बलवंत सिंह, रामरूप, सतपाल, रामकला, मोनी शर्मा, देवव्रत शर्मा, गोपाल शर्मा, संजू मुनीम, धूप सिंह मौण, बलबीर सिंह, रत्न सिंह द्वारा यात्रियों के रहने, खाने पीने के साथ भोलेबाबा के निर्विघ्न जलाभिषेक के लिए बेहतरीन प्रयास किए जा रहे हैं।

फोटो नंबर-43 व 44
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