छह अगस्त की रात को जब प्रदेश सहित अन्य प्रदेशों के 8 लाख से अधिक युवा हरियाणा पुलिस में सिपाही भर्ती के लिए देर रात तक तैयारी में जुटे रहे, वहीं लीक गिरोह के सदस्य अधिक से अधिक उम्मीदवारों को आंसर-की बेचकर उनके साथ धोखाधड़ी के फिराक में थे। यह तो हरियाणा सरकार ने तत्परता से कदम उठाया और परीक्षा की आंसर-की लीक होने की सूचना मिलते ही परीक्षा को रद्द कर दिया। अन्यथा कई उम्मीदवार तो आंसर-की हासिल करने के बाद सुबह व दोपहर की सात अगस्त की परीक्षा दे चुके थे। यदि यह परीक्षा सिरे चढ़ जाती तो वे योग्य एवं मेहनत से तैयारी करने वाले युवाओं को पीछे छोड़कर हरियाणा पुलिस में भर्ती हो जाते।
करीब आधा दर्जन युवकों ने मिलकर हरियाणा के 8 लाख से अधिक युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का प्रयास किया। साथ ही उनकी मेहनत पर इस लीक कांड के कारण पानी फिर गया। इसके अलावा सात अगस्त को हरियाणा के एक जिले से दूसरे जिलों में परीक्षा देने पहुंचे युवाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। उनके समय व पैसे की बर्बादी हुई। सबसे पहले ऑंसर की दिल्ली पहुंची। जहां से हिसार और वहां से कैथल। बाद में यह जींद, पानीपत, रेवाड़ी, अंबाला, करनाल व फतेहाबाद जिलों तक पहुंची। फतेहाबाद पुलिस ने इस मामले में सबसे पहले एफआईआर दर्ज की थी। इसके बाद एक-एक करके कड़ी जुड़ती गई और अंतरराज्यीय भर्ती लीक गिरोह का खुलासा हुआ।
अभी पुलिस द्वारा इस मामले में और गिरफ्तारियां की जानी हैं। जिसमें कई अहम खुलासे हो सकते हैं। लेकिन इस परीक्षा लीक कांड ने हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग की तैयारियों पर एक बार फिर बड़ा सवालिया निशान लगाया और विपक्ष को हरियाणा सरकार को घेरने का एक ओर बड़ा अवसर दे दिया। हरियाणा सरकार ने भर्ती परीक्षा को तुरंत रद्द करके पूरे गिरोह का भंडाफोड़ करके विपक्ष के सवालों का जवाब देने का प्रयास जरूर किया है। लेकिन कई सवाल अभी अनसुलझे हैं।