पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने चौधरी बीरेंद्र सिंह के बारे में कहा कि हम भाई भी हैं, दोस्त भी हैं और राजनीतिक विरोधी भी हैं। कइयों को यह बात हजम नहीं होती कि हम राजनीति विरोधी भी हो सकते हैं लेकिन परिस्थितियां कुछ भी करवा देती हैं।
उन्होंने कहा कि बांगर के क्षेत्र में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए जो शिक्षण संस्थान यहां पर बनाया गया है उसके लिए बीरेंद्र सिंह बधाई के पात्र हैं। मेरे दादा जी रोहतक की शिक्षण संस्थानों के प्रधान थे तो बीरेंद्र सिंह के नाना उन संस्थाओं के सचिव थे। इस पुस्तक में प्रदेश की संस्कृति की झलक भी दिखाई देगी। उनके लिए गौरव की बात है कि उनके नाना की रचनाओं पर आधारित पुस्तक का विमोचन करने का अवसर मिला। उनके नाना हरद्वारी श्योकंद अनपढ़ थे लेकिन वो शिक्षा पर हमेशा जोर देते थे। जिससे प्रेरित होकर उनके पिता रणबीर सिंह, बीरेंद्र सिंह के नाना सर छोटूराम ने रोहतक के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों में शिक्षण संस्थानों को स्थापित करने का काम किया। चौधरी बीरेंद्र सिंह ने कहा कि दादा हरद्वारी साहित्यकार के साथ-साथ वैध भी थे। दादा हरद्वारी में अपने भाईयों के लिए त्याग की भावना थी। वह हमेशा बुजुर्गों द्वारा कहीं गई बातों को मानने के साथ-साथ उनसे अधिक उन पर अमल करते थे। हमें भी चाहिए कि हम अपने बुजुर्गों की बातों को माने, बुजुर्गों का सम्मान करें।