शिकायत लेकर डीसी कार्यालय पहुंचे गांव जीवनपुर के ग्रामीण। संवाद
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जींद। जीवनपुर गांव के मनरेगा मजदूरों में अधिकारियों पर फर्जीवाड़े का आरोप लगाते हुए मंगलवार को डीसी नरेश नरवाल को शिकायत दी। इन लोगों ने कहा कि पंचायत के कुछ लोगों ने डीआरडीए के अधिकारियों के साथ मिलकर ऐसे लोगों के खातों में करीब 15 लाख रुपये डाल दिए, जिन्होंने कभी मरनेगा के तहत काम ही नहीं किया। इसके विपरीत गांव में पूरी तरह से मजदूरी पर निर्भर रहने वाले लोगों को काम नहीं दिया गया।
मनरेगा मजदूरों ज्योति, सूरज, कविता, प्रमिला, सुमित्रा, सरोज, तिलकराज, सतबीर, रामफल व रामेश्वर ने कहा कि पंचायत के लोगों ने अपने चहेतों के फर्जी जॉब कार्ड बनवा दिए हैं। इनके नाम से ही फर्जी तरीके से हाजिरी लगाकर करीब 15 लाख रुपये का भुगतान किया गया है। इसके तहत गांव में स्कूल की चहारदीवारी, नगूरां रोड पर फिरनी का निर्माण व गांव के तालाब की खुदाई करवाई गई थी। पहले जहां गांव के जरूरतमंद लोगों के 85 कार्ड बने हुए हैं, लेकिन पूरे साल में केवल उनको छह दिन का काम दिया गया। वहीं तीन महत्वपूर्ण कार्यों पर जिन मनरेगा मजदूरों को काम करते हुए दिखाया है, वे साधन संपन्न हैं। उनके फर्जी जॉब कार्ड बनाकर पंचायत अधिकारियों से मिलीभगत करके उनके खातों में राशि डलवा कर उसे हड़प लिया। जिन 25 लोगों को काम पर दिखाया गया है, उन्होंने एक दिन भी काम नहीं किया और फर्जी हाजिरी लगाई गई है। इस कार्य के लिए खातों में राशि डाली गई है, उसमें मैट के हस्ताक्षर तक नहीं करवाए गए। इसलिए मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और भविष्य में मनरेगा के पात्र लोगों को ही काम दिया जाए, ताकि उनका घर का गुजारा चल सके। डीसी नरेश नरवाल ने मनरेगा मजदूरों को उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
डीआरडीए के सीईओ डॉ. किरण सिंह ने कहा कि यह मामला जानकारी में नहीं है। ग्रामीण मुझे शिकायत दें, इसकी जांच करवाई जाएगी। यदि किसी ने भी गलत किया है तो उसे छोड़ा नहीं जाएगा।