जींद। शक्ति और भक्ति के अनूठे संगम भगवान परशुराम के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में रविवार को माता वैष्णवी धाम में सत्संग का आयोजन हुआ। आचार्य पवन शर्मा ने कहा कि परशु पराक्रम का प्रतीक है और राम सनातन के पर्याय हैं। इन दोनों का समन्वय ही भगवान परशुराम का साक्षात विग्रह है जिनका चरित्र आज के समय में सर्वाधिक प्रासंगिक और अनुकरणीय है।
आचार्य पवन शर्मा ने कहा कि समाज में अक्सर उनके क्रोध की चर्चा होती है लेकिन उसके पीछे निहित न्याय और धर्म की भावना को समझना आवश्यक है। स्वार्थ या अहंकार के लिए किया गया क्रोध वर्जित है लेकिन अन्याय के विरुद्ध संघर्ष मानवता का लक्षण है। भगवान परशुराम की मान्यता थी कि सज्जनों को विनम्रता और ज्ञान से जीता जा सकता है जबकि दुष्टों के दमन के लिए प्रतिरोध और दंड अनिवार्य है।
उन्होंने समाज को असामाजिक तत्वों से मुक्त कराकर एक नई दिशा प्रदान की थी। अंत में समाज के प्रतिष्ठित नागरिकों ने भगवान परशुराम के चरणों में पुष्पांजलि अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। आचार्य ने आह्वान किया कि उनके चरित्र को जीवन में उतारना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।