धान खरीद में कमीशन का आरोप लगा रहे किसान। संवाद
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उचाना। मार्केट कमेटी कार्यालय के सामने उचाना मंडी पीआर धान बेचने आए किसानों ने धान बिकवाने के नाम पर कमीशन मांगने का आरोप लगाया। इसको लेकर उन्होंने नारेबाजी भी की। हालांकि एफसीआई के परचेजर दिनेश कुमार ने इन आरोपों को निराधार बताया है। किसानों ने इसकी जांच कराने की मांग की है। वहीं, आढ़तियों के एक दूसरे गुट ने एफसीआई का समर्थन करते हुए कहा कि कमीशन लेने जैसी कोई बात नहीं है। कुछ लोग मंडी को बदनाम करना चाहते हैं।
इससे पहले शनिवार को हुई पीआर खरीद की जांच कराने की मांग भी आढ़तियों व किसानों ने की है। वहीं परचेजर दिनेश कुमार का कहना है कि नमी और बिना सफाई वाले धान को नहीं खरीदा जा रहा है। उदयपुर गांव निवासी किसान हरदीप ने कहा कि सोमवार को भी उनका धान नहीं बिक पाया। इसमें 14 प्रतिशत ही नमी थी। सरकार ने 17 प्रतिशत नमी वाले धान को खरीदने के आदेश दिए हैं। इसके बावजूद अधिकारी मनमानी चला रहे हैं। किसानों का कहना है कि धान बिकवाने के लिए प्रति क्विंटल 110 रुपये कमीशन मांगा जा रहा है। किसान हरदीप के अनुसार कुछ दिन पहले उसने एक ट्रॉली धान बेचा था। सरकारी रेट 1960 रुपये प्रति क्विंटल होने के बावजूद उसका धान 1850 रुपये प्रति क्विंटल बिका है। कुछ आढ़तियों ने बताया कि नौ अक्तूबर को हुई 6500 क्विंटल पीआर धान की खरीद हुई थी। इसमें बड़े स्तर पर कमीशन का खेल चला है।
वहीं दूसरी ओर मंडी प्रधान बलराज श्योकंद ने कहा कि एफसीआई वाला कोई भी पैसे नहीं लेता है। धान में नमी अधिक होने व सफाई नहीं होने ही धान नहीं खरीदा जा रहा है। उन्होंने कहा कि दो दिन पहले उन्होंने दो हजार बैग धान खरीदा है। वहीं दाड़न खाप के प्रधान दलबीर सिंह खेड़ी मसानिया ने कहा कि एफसीआई की खरीद है सही प्रकार से चल रही है।
मार्केट कमेटी उचाना के सचिव नरेंद्र कुंडू ने बताया कि इस बारे में कुछ लोगों की शिकायत आई है। लिखित में शिकायत ली गई है। मामले की जांच की जाएगी। यदि कमीशन मांगने का कोई मामला आता है तो कार्रवाई होगी।