संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की फसलों के उचित दाम, कर्जमाफी और श्रमिकों के अधिकारों समेत विभिन्न मांगों को लेकर सोमवार को किसान, मजदूर, कर्मचारी, छात्र और नौजवानों ने एकजुट होकर सरकार के खिलाफ सड़क पर उतर आए। संगठनों के लोग ने किसान-मजदूर एकता जिंदाबाद, साझी मांगें-साझा संघर्ष जिंदाबाद और जात-धर्म पर नहीं बंटेंगे जैसे नारे लगाए।
जेल भरो आंदोलन के तहत सैकड़ों प्रदर्शनकारी नेहरू पार्क में एकत्र हुए। जनसभा के बाद प्रदर्शनकारी जुलूस के रूप में लघु सचिवालय पहुंचे। इस दौरान सरकार विरोधी नारे लगाते हुए 670 प्रदर्शनकारियों ने गिरफ्तारी दी। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के मद्देनजर पहले से पुलिस बल तैनात किया गया था।
जुलूस के कारण वाहनों की आवाजाही बाधित होने से करीब आधा घंटे तक रानी तालाब पर जाम लगा रहा। जाम में वाहन चालक फंसे रहे और उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसान की उपज का उचित मूल्य, मजदूर को सम्मानजनक मजदूरी और युवाओं को रोजगार देने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। कांग्रेस नेता ऋषिपाल सिहाग कि महंगाई और बेरोजगारी का सीधा असर आम परिवारों पर पड़ रहा है, जबकि किसान बढ़ती लागत और फसलों के उचित दाम नहीं मिलने से परेशान हैं। एमएसपी की कानूनी गारंटी और कर्जमाफी की मांग : नेताओं ने अमेरिका के साथ कृषि क्षेत्र में प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते को रद्द करने और फसलों की एमएसपी पर कानूनी खरीद की गारंटी देने की मांग की। किसान और मजदूरों की कर्जमाफी, फसल बीमा कंपनियों की मनमानी पर रोक और वर्ष 2023, 2024 व 2025 में बाढ़ एवं सेम से प्रभावित फसलों का लंबित मुआवजा तुरंत जारी करने की मांग भी उठाई गई।
नहरी सिंचाई और पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था की समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग रखी। इस मौके पर मास्टर चांद बहादुर, मास्टर बलबीर सिंह, जोगिंद्र नैन, राजबीर चौहान, महाबीर, धर्मबीर लोहान, संदीप जाजवान, राजबाला व अन्य मौजूद रहे।
10जेएनडी 18: गोहाना रोड पर मांगों को लेकर विभिन्न संगठन सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए गिरफ