जींद। भगवान श्रीकृष्ण ही परम सत्य हैं। कृष्ण ही सभी ऊर्जा को प्रदान करते हैं। कृष्ण ही रस के सागर हैं। सभी जीव भगवान के ही छोटे-छोटे भाग हैं। ये बातें गौरदास महाराज ने सोमवार को पुराना बस स्टैंड स्थित पंजाबी धर्मशाला में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कहीं।
उन्होंने कहा कि जीव अपने तटस्थ स्वभाव की वजह से ही मुश्किलों में आते हैं। अपने तटस्थ स्वभाव की वजह से ही जीव सभी बंधनों से मुक्त होते हैं। जीव इस दुनिया और एक जैसे भगवान से पूरी तरह से अलग होते हैं। पूर्ण और शुद्ध श्रद्धा ही जीवों का सबसे बड़ा अभ्यास है। कृष्णा का शुद्ध प्यार ही सर्वश्रेष्ठ लक्ष्य है। चैतन्य के अनुसार भक्ति ही मुक्ति का साधन है। उनके अनुसार जीवों के दो प्रकार होते है नित्य मुक्त और नित्य संसारी। नित्य मुक्त जीवों पर माया का प्रभाव नहीं पड़ता जबकि नित्य संसारी जीव मोह माया से भरे होते हैं। चैतन्य महाप्रभु कृष्ण भक्ति के धनी थे। गौरदास महाराज ने कहा कि अब समय आ गया है कि अपने धर्म की रक्षा के लिए सभी एकजुट हों। कुछ लोगों द्वारा श्रीराम मंदिर निर्माण का विरोध किया गया था। ऐसे में अब भी हम नहीं जागे तो बहुत देर हो जाएगी। इसलिए संतों के बताए रास्ते पर चलते हुए श्री सनातन धर्म को आगे बढ़ाना है। इस मौके पर राधेश्याम चिल्लाना, ओम नागपाल, जतिन, हरीश, मनीष, अनिल, डॉ. एसके आहूजा, रामप्रकाश मौजूद रहे।