जयंती देवी मंदिर का फोटो, जिसके नाम से जींद का नामकरण हुआ है।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
55 साल पहले पंजाब राज्य से अलग होकर हरियाणा राज्य का गठन हुआ था। उस समय हरियाणा में महज सात जिले होते थे, जिनमें जींद भी शामिल था। हालांकि हरियाणा के गठन के साथ बनने वाले अन्य जिलों के मुकाबले जींद विकास के मामले में पीछे रह गया। बावजूद इसके शिक्षा, स्वास्थ्य के साथ आधारभूत ढांचे में काफी विस्तार हुआ है। किसी जमाने में एक कॉलेज वाले जींद जिले में अब 17 कॉलेज व एक विश्विद्यालय बन चुके हैं। इसके अलावा मेडिकल कॉलेज का काम प्रगति पर है।
जिले में पहले व अब की स्थिति
साल 1966 2021
- क्षेत्रफल 2691 वर्ग किलोमीटर 2702 वर्ग किलोमीटर
- आबादी 369610, (1971) 1334152: 2011 की जनगणना के अनुसार
- गांव 301 299
- नगर परिषद/पालिका 05 05
- उपमंडल 02 04
- पुलिस थाना 05 13
- साक्षरता दर 18.51 75.7
आधारभूत ढांचे में हुई खासी प्रगति
जिस समय पंजाब से अलग होकर हरियाणा राज्य बना, जींद में शिक्षा, स्वास्थ्य व आधारभूत ढांचे की काफी कमी थी। वहीं आज जींद में तीन आरओबी बन चुके हैं और एक निर्माणाधीन है। बाईपास पर नया बस स्टैंड बनकर तैयार हो चुका है। बाईपास की सौगात मिल चुकी है और मेडिकल कॉलेज निर्माण का काम प्रगति पर है।
जयंती देवी के नाम से पड़ा जींद का नाम
यूं तो जींद का इतिहास महाभारत काल से है। शहर के पूर्वी छोर पर बसा पांडू पिंडारा गांव इसका प्रमाण है। मान्यता है कि पांडवों ने विजय की देवी जयंती की पूजा करने के लिए उस समय के शहर के पश्चिमी छोर पर जयंती देवी मंदिर का निर्माण करवाया था। मंदिर परिसर में हजारों वर्ष पुराना शिवलिंग भी है, जिसकी पुष्टि पुरातत्व विभाग ने की है। कहा जाता है कि देवराज इंद्र के पुत्र जयंत ने असुरों से छिपने के लिए एक बड़े वन में आश्रम लिया। उन्होंने वहीं पर जयंती माता की पूजा की। उनके नाम से ही जींद का नाम प्राचीन काल में जयंत नगरी या जयंतपुरी रहा है। इस मंदिर में पूजा-अर्चना करने दूर-दूर से श्रद्धालु बड़ी संख्या में आते हैं।
महज चंद दुकानों का होता था बाजार, आज हैं बड़े-बड़े शोरूम
जींद के इतिहास को संजोने वाले गुलशन भारद्वाज बताते हैं कि उस समय बाजार तांगा चौक के आसपास ही होता था। तांगा चौक से रेलवे जंक्शन तक तांगे जाते थे। भारद्वाज के अनुसार मेन बाजार आज की स्थिति से करीब दोगुना चौड़ा होता था। इसमें साइकिल की मरम्मत से लेकर मिठाई, किराना, आटा चक्की से लेकर उस समय की जरूरत की सभी दुकानें होती थीं। आज शहर में एकल ब्रांड के बड़े-बड़े शोरूम बन चुके हैं।
स्कूल से अब पहुंचे विश्वविद्यालय तक
1966 में जब हरियाणा राज्य व जींद जिला बने यहां सिर्फ मैट्रिक तक के दो ही स्कूल थे। एक सीनियर सेकंडरी और दूसरा एसडी पब्लिक स्कूल। इसके बाद जाट संस्था ने जाट स्कूल खोला, जो अब महाविद्यालय में बदल चुका है। राजकीय कन्या महाविद्यालय के साथ-साथ राजकीय महाविद्यालय। अब जींद जिले में चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय भी खुल चुका है। शिक्षा के क्षेत्र में जिले में काफी प्रगति हुई है। इसके अलावा जींद में मेडिकल कॉलेज का काम भी शुरू होना है।
स्वास्थ्य सेवाओं में हुआ सुधार
1966 में जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का खास ढांचा दुरुस्त नहीं था। तब जींद रियासत के राजा रघुबीर सिंह द्वारा वर्तमान पालिका बाजार की जगह अस्पताल बनवाया गया था। इसके बाद 1977 में जींद में नागरिक अस्पताल का निर्माण हुआ। 20 बेड का अस्पताल अब 200 बेड तक पहुंच चुका है। हैबतपुर गांव के पास मेडिकल कॉलेज का निर्माण किया जा रहा है।
सत्ता में शीर्ष तक तक नहीं पहुंच पाए जींद के नेता
शुरू से ही जींद राजनीति के क्षेत्र में काफी आगे रहा है। इसके बावजूद जींद के नेता सत्ता के शीर्ष तक नहीं पहुंच पाए। हालांकि एक दौर में जींद के राजनेता चौधरी दल सिंह संयुक्त पंजाब में ही मंत्री रहे। राजनीति में अच्छा दबदबा रहा, लेकिन मुख्यमंत्री का पद जींद के नेताओं को नहीं मिल पाया।
खेल के क्षेत्र में मिली खास पहचान
जींद जिले ने खेल के क्षेत्र में खास पहचान बनाई है। जिले के खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। इनमें भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ी युजवेंद्र चहल, ओलंपिक में भाग लेने वाली अंशु मलिक, अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर सुमित कुंडू, स्काइंग खिलाड़ी विकास राणा व पहलवान हरदीप ढिल्लों जैसे नाम हैं।
महाभारत कालीन इतिहास संजोए है सफीदों का नाग क्षेत्र तीर्थ
सफीदों में स्थित नाग क्षेत्र तीर्थ महाभारतकालीन इतिहास को संजोए हुए है। वामन पुराण में इसका वर्णन सर्पदधि तीर्थ के रूप में मिलता है। खानसर चौक पर स्थित है। वर्तमान में यहां स्थित सरोवर पर एक अष्टकोण बुर्जी युक्त उत्तर मध्यकालीन घाट भी बना हुआ है।