जींद/उचाना। जहां एक ओर लोग घरों में मकर संक्रांति का पर्व मना रहे हैं, वहीं किसानों को यूरिया के लिए दुकानों के बाहर लंबी लाइन लगानी पड़ रही है। शुक्रवार को जींद, उचाना व नरवाना में किसान यूरिया के लिए हलकान रहे। हालांकि नरवाना में दोपहर को 52 हजार बैग पहुंचे हैं, जिनका वितरण जिले में किया जा रहा है।
उचाना की पुरानी अनाज मंडी में किसान सुबह छह बजे ही पहुंचना शुरू हो गए। जरूरत के अनुसार यूरिया लेने के लिए किसान परिवारों के साथ पहुंचे। यूरिया खाद की कुछ समय से किल्लत चल रही है। शहर में प्राइवेट खाद विक्रेताओं के यहां यूरिया खाद शुक्रवार को आया। कभी किसी दुकान पर तो कभी किसान दुकान पर चक्कर किसान दोपहर तक काटते रहे। महिलाएं भी गांव से खाद लेने के लिए मंडी आई। कई दिनों से सर्दी बढ़ रही है। ऐसे में कड़ाके की ठंड में अपनी फसल को बचाने के लिए यूरिया लेने के लिए किसान लाइन में लग रहे है।
लाइन में लगने के बाद भी खाद मिलेगा या नहीं यह भी पक्का नहीं है। किसान राजेंद्र, जगबीर, सुखपाल, रामकुमार ने कहा कि इस बार डीएपी के बाद यूरिया को लेकर किसान परेशान हैं। यूरिया खाद की शुरू से ही किल्लत चली आ रही है जो अब भी जारी है। शासन, प्रशासन दावे कर रहा है कि यूरिया की किल्लत नहीं रहने दी जाएगी, जबकि किसानों को यूरिया के लिए परेशान होना पड़ रहा है। अब गेहूं में यूरिया नहीं डाला तो उत्पादन प्रभावित होगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार किसानों की आमदनी तो बढ़ाने के दावे कर रही है, लेकिन जो कृषि के लिए चाहिए वह किसानों को रुपये में भी लाइनों में लग कर लेना पड़ रहा है। पहले डीएपी अब यूरिया को लेकर परेशानी हो रही है। परिवार की महिलाओं, बेटियों के साथ वह खाद लेने के लिए आ रहे हैं, ताकि आवश्यकतानुसार वह यूरिया के बैग प्राप्त कर सके।
पहुंचा है खाद
नरवाना में 52 हजार बैग यूरिया पहुंचा है। इसमें जरूरत के अनुसार पूरे जिले में भेजा जा रहा है। खाद की कमी है। ऐसे में किसानों को लाइन लगानी पड़ रही है, लेकिन नियमानुसार खाद दिया जा रहा है।
- डॉ. नरेंद्र पाल, गुणवत्ता नियंत्रक, कृषि विभाग।