टपरीवास कॉलोनी के बच्चों के साथ शारदा आसरी।
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सात साल पहले शहर के एक निजी स्कूल में नौकरी करने वाले आसरी दंपती के जीवन में उस समय नया मोड़ आया जब वह नहर के किनारे से होकर टपरीवास कॉलोनी से गुजरते थे। वहां पर बाबा की मजार पर प्रतिदिन 20 से 30 मासूम बच्चे मजार पर प्रसाद चढ़ाने का इंतजार करते पाए जाते थे। इनकी इस हालात को देखकर इस दंपती मोहित आसरी व शारदा आसरी को तरस आता था और इनके लिए कुछ करने की मन में आई। इसके बाद दंपती ने इनके जीवन को सुधारने का प्रण लिया और शारदा आसरी ने खुद स्कूल की नौकरी छोड़ इन बच्चों को पढ़ाने का काम शुरू किया।
आसरी दंपती के सामने इन बच्चों को पढ़ाने के लिए जगह नहीं मिलना भी बड़ी परेशानी थी। इसके बाद इन्होंने टपरीवास कॉलोनी में ही एक बदहाल धर्मशाला में सफाई करवाकर बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया। इसमें भी बड़ी समस्या थी कि बच्चों को पढ़ाने के लिए अभिभावक भी सहयोग नहीं कर रहे थे और न ही बच्चे इनके पास निरंतर आते थे। इसके बाद पहले तो अभिभावकों को जागरूक किया बाद में कालोनी में एक बुजुर्ग व्यक्ति इनके सहयोग में आया और सभी बच्चों को इनके पास पढ़ने के लिए भेजने लगा। इसके बाद प्रशासन की सहायता से धर्मशाला का सुधार करवाया ताकि बच्चों के बैठने के लिए जगह उपयुक्त हो सके। इतना ही नहीं इस दंपति ने इन बच्चों को आर्ट व नृत्य में निपुण करने के लिए भी अन्य निजी स्कूलों में कार्य करने वाले अध्यापकों से सहायता मांगी। इन अध्यापकों ने भी बच्चों को नृत्य तथा कला की कक्षाएं निरंतर दी। अब तक इस दंपती ने 150 बच्चों का सरकारी स्कूलों में दाखिला करवाया है। इनके लिए समय-समय पर स्टेशनरी भी वितरित की जाती है। इस दंपती के पास 05 से 14 आयु के बच्चे शिक्षा लेने के लिए आते हैं। जिन बच्चों को स्कूलों में दाखिला करवाया है। उन बच्चों को स्कूल से मिला होमवर्क भी यह दंपति प्रतिदिन पूरा करवाते हैं।