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पांडु-पिंडरा तीर्थ पर आज उमड़ेगी श्रद्धालुओं की भीड़

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अमावस्या से पहले मंगलवार को मेले की तैयारियां करते लोग। संवाद - फोटो : Jind
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जींद। श्राद्ध पक्ष खत्म होने पर बुधवार को अमावस्या पर पितरों के अपने तर्पण के लिए पिंडारा तीर्थ पर श्रद्धालु की भीड़ उमड़ेगी। मंगलवार को श्रद्धालु पिंडदान करेंगे। अमावस्या के मौके पर इस तीर्थ पर मेला भी लगता है।
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लोगों की भीड़ को देखते हुए प्रशासन भी सुरक्षा की दृष्टि से व्यवस्था बनाएगा। यहां पुलिसकर्मियों को तैनात किया जाएगा। मान्यता है कि महाभारत के युद्ध के बाद पितरों के तर्पण के पांडवों ने भी पिंडारा तीर्थ में ही पिंडदान किए थे। हालांकि पांडव यहां 12 साल तक सोमवती अमावस्या के योग का इंतजार करते रहे, लेकिन यह योग नहीं बना। ऐसे में कलयुग में भी लोग यहां पिंडदान करते हैं। पिंडारा तीर्थ के महत्व के बारे में पीठाधीश्वर आचार्य राजेश स्वरूप शास्त्री ने बताया कि पिंडारा तीर्थ को पिंडतारक, सोमतीर्थ व पिंडार्क नाम से जाना जाता है। आचार्य राजेश स्वरूप शास्त्री के अनुसार मान्यता है कि जब पितामह भीष्म वाणों की शैया पर थे, तब धर्मराज युधिष्ठिर ने उनसे पितरों को मुक्ति के लिए पूछा था। इस पर भीष्म ने पिंडारा तीर्थ में स्नान कर पिंडदान करने के लिए कहा था। आचार्य के अनुसार शास्त्रों में बताया गया है कि मंकण ऋषि ने सूर्य के बताने पर अपने पितरों के उद्धार के लिए पिंडारा तीर्थ पर पिंडदान किया। उन्होंने कहा कि शास्त्रों के अनुसार गया जी में दान का जो महत्व है, वही पिंडारा में है। पांडवों ने पितरों के लिए पिंडरा में पिंडदान किया। इससे इसका नाम पांडू पिंडारा पड़ा है। यहां तीर्थ पर प्रदेश के साथ-साथ देश के अन्य हिस्सों से भी लोग पिंडदान करने आते हैं। शास्त्रों के अनुसार एक व्यक्ति अपनी तीन पीढ़ियों के लिए पिंडदान कर सकता है। इसमें पिता, दादा व परदादा शामिल हैं।
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