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अदालत के स्थगन आदेश के बावजूद जमीन की वसीयत व इंतकाल करने पर नायब तहसीलदार समेत सात लोगों पर केस दर्ज

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सफीदों। अदालत के स्थगन आदेश के बाद भी जमीन की वसीयत और इंतकाल करने पर सदर थाना सफीदों पुलिस ने सफीदों के नायब तहसीलदार रामपाल समेत सात लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा समेत विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
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गांव रत्ताखेड़ा निवासी राजबाला ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उसकी पहली शादी 1986 में गांव रत्ताखेड़ा निवासी सुशील के साथ हुई थी। इसमें राजेश उसका बेटा पैदा हुआ। 1988 में सुशील की मौत के बाद उसकी दूसरी शादी 1990 सुशील के छोटे भाई सतीश से कर दी गई। इसमें तीन लड़कियां तथा एक लड़का अंकित हुआ, उसके ससुर सत्यनारायण ने राजेश तथा अंकित के नाम वसीयत करवा दी। यह वसीयत 2007 में उसके दोनों बच्चों के नाम होनी थी, लेकिन गांव रत्ताखेड़ा निवासी नरेंद्र तथा उसकी बेटी बिमला ने उसके ससुर सत्यनारायण को बहला फुसलाकर ऋण लेने की बात कहकर दूसरी वसीयत करवा दी। आरोपियों ने नायब तहसीलदार से मिलीभगत कर जमीन को निर्मला तथा दूसरी बेटी बिमला के नाम करवा लिया। इसका इंतकाल 2018 में दर्ज हुआ है। पहली वसीयत में उसे सतीश की पत्नी दिखाया गया है तो दूसरी वसीयत में उसे सुनील की पत्नी दिखाया गया है। मामला संज्ञान में आने के बाद अदालत का सहारा लिया गया तो इस मामले पर स्थगन आदेश जारी कर दिए। इसके बावजूद नरेंद्र तथा बिमला ने 2019 में जमीन का ठेका सफीदों निवासी राजन के नाम करवा दिया। इसके बाद वह तहसीलदार की अदालत में भी पेश हुई और पुराने इंतकाल का हवाला देते हुए राजेश तथा अंकित के वारिश होने व अदालत के स्थगन आदेश की बात बताई। बावजूद इसके नायब तहसीलदार रामपाल ने दूसरे पक्ष को लाभ पहुंचाने की कोशिश की। सदर थाना सफीदों पुलिस ने राजबाला की शिकायत पर गांव रत्ताखेड़ा निवासी नरेंद्र, उसकी बेटी बिमला, निर्मला, कैलाश कॉलोनी सोनीपत निवासी रवि, गांव बला निवासी दीपक, राममेहर तथा सफीदों के नायब तहसीलदार रामपाल के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
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दर्ज किया है केस
यह मामला एसपी कार्यालय से आया था। इस पर तहसीलदार सहित सात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। मामले की जांच की जा रही है।
धर्मवीर सिंह, सदर थाना प्रभारी, सफीदो
वर्जन
मुझ पर लगे आरोप निराधार
इस मामले मेें मेरे खिलाफ सभी आरोप निराधार हैं। यह मामला मेरे समक्ष लाया गया था। इस पर नियमानुसार कार्रवाई हुई है। इसके बाद एसडीएम द्वारा भी जांच की गई है।
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रामपाल सिंह, तहसीलदार।
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