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एसोसिएशन प्रोफेसर को भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम में चार वर्ष की कैद व दस हजार रुपये जुर्माना लगाया

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जींद। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जसबीर सिंह संधू की अदालत ने शुक्रवार को राजकीय महाविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर सुभाष दुग्गल को रिश्वत लेने के एक मामले में दोषी करार देते हुए चार वर्ष की कैद तथा 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना नहीं भरने पर दो माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी।
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अदालत में चले अभियोग के अनुसार विजिलेंस को शिकायत मिली थी कि राजकीय महाविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर सुभाष दुग्गल को वर्ष 2015 में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की तरफ से पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया था। उन्होंने परीक्षा के दौरान नकल करने में छूट देने के लिए पांच हजार रुपये प्रति छात्र से मांग की थी। इस पर गांव छात्तर निवासी संजय व कुछ अन्य छात्रों ने उन्हें नकल करवाने की एवज में रिश्वत की राशि दे दी थी। इसकी वीडियो भी बनाई गई थी। इस मामले में महाविद्यालय के ही प्राध्यापक रहे अनूप मोर ने शिकायत की थी। जांच में प्रो. दुग्गल पर लगे आरोप सही पाए गए थे। इस पर सुभाष दुग्गल के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया। तभी से यह मामला अदालत में विचाराधीन था। शुक्रवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जसबीर सिंह संधू की अदालत ने एसोसिएशन प्रोफेसर सुभाष दुग्गल को चार वर्ष कैद तथा 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
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