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दिवाली के बाद 200 अंक बढ़कर एक्यूआई 450 के पार

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सुबह करीब सात बजे छाया स्मॉग। संवाद - फोटो : Jind
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जींद। जिले में बिक्री पर रोक रहने के बावजूद जिले में धड़ल्ले से पटाखे चले। प्रशासन लोगों को पटाखे जलाने से रोकने में पूरी तरह से नाकाम रहा। इसका असर प्रदूषण स्तर पर साफ देखा गया। वीरवार को एक्यूआई 447 व शुक्रवार को 462 दर्ज किया गया। हालांकि दिवाली से पहले एक्यूआई 261 था।
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जिले में पटाखों का चलना दिवाली से दो दिन पहले ही शुरू हो गया था। इसके बावजूद प्रशासन इसको नहीं रोक पाया। ग्रामीण क्षेत्र में दुकानों पर खुलेआम पटाखे बेचे गए। इसमें ग्रीन पटाखों की बजाय साधारण पटाखों की अधिकता रही। इसके चलते जिले में प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ गया। बुधवार व वीरवार को रात-रात भर पटाखे चलते रहे।
टूटते रहे नियम, उड़ता रहा धुआं
पटाखे चलने से न सिर्फ वायु प्रदूषण पर असर पड़ा, बल्कि कुछ पटाखे काफी तेज आवाज वाले भी थे। इसके चलते धुएं के साथ-साथ ध्वनि प्रदूषण भी हुआ।
आंखों में रही जलन
प्रदूषण का स्तर बढ़ने से वीरवार को दिनभर वातावरण में स्मॉग छाया रहा। हालांकि हवा चलने से शुक्रवार को यह छंट गया। वहीं शुक्रवार सुबह ग्रामीण क्षेत्रों में कोहरा रहा। इसके चलते हवा में उड़ रहे प्रदूषण के कण काफी नीचे आ गए। इससे लोगों को आंखों में जलन रही।
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एक सप्ताह का प्रदूषण स्तर
तारीख एक्यूआई
01 278
02 268
03 261
04 447
05 462
प्रदूषण स्तर के मानक
एक्यूआई मानक
0-50 अच्छा
51-100 संतोषजनक
101-200 औसत
201-300 खराब
301-400 बहुत खराब
401-500 बेहद गंभीर।
मास्क का करें इस्तेमाल, आंखों को धोते रहें
नागरिक अस्पताल जींद के डिप्टी एमएस डॉ. राजेश भोला ने कहा कि प्रदूषण का स्तर काफी अधिक है। ऐसे में छोटे बच्चों, बुजुर्गों व सांस के रोगियों को काफी संभल कर रहना चाहिए। हमेशा मास्क का प्रयोग करें। इसके अलावा सामान्य पानी से आंखों को छींटे मारकर धोते रहें। यदि सांस लेने में दिक्कत हो तो चिकित्सक को जरूर दिखाएं।
इस संबंध में डीसी नरेश नरवाल ने बताया कि पटाखों पर रोक लगाने के लिए प्रशासनिक टीम पूरी तरह से मुस्तैद रही। इसके चलते जांच भी की गई। जहां पटाखे मिले, वहां कार्रवाई की गई। कुछ लोगों के पास पुराने पटाखे हो सकते हैं। इसकी जांच करवाई जाएगी। खुलेआम कहीं पटाखा नहीं बिका है।
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