लघु सचिवालय के बाहर शुरू किए गए धरने में मौजूद किसान आंदोलन के समर्थक। संवाद
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बसताड़ा टोल प्लाजा पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में करनाल के बाद नरवाना के लघु सचिवालय के बाहर भी आंदोलन समर्थित लोगों ने धरना व भूख हड़ताल शुरू कर दी है। धरने में समाजसेवी विशाल मिर्धा, सुनील बद्दोवाल व सुरेश जुलहेड़ा द्वारा भूख हड़ताल शुरू की गई है। नरवाना के वकीलों ने भी धरने व भूख हड़ताल का समर्थन किया है।
धरनारत लोगों की मांग है कि बसताड़ा टोल प्लाजा पर जिस अधिकारी ने पुलिस को किसानों के सिर फोड़ने के आदेश दिए थे, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। धरने पर पहुंचे किसान नेता होशियार सिंह खरल ने कहा कि हरियाणा-पंजाब का किसान सरकार के लाठीचार्ज में मरने वाले किसान को न्याय दिलवाने के लिए पिछले तीन दिनों से करनाल में डेरा डाले हुए हैं। लेकिन सरकार के इशारे पर चल रहा प्रशासन किसानों की कोई भी मांग मानने के लिए तैयार नहीं है और न ही उस अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई करने के लिए तैयार है, जिसने बसताड़ा टोल प्लाजा पर किसानों के सिर फुड़वाए। सरकार व प्रशासन के इस बेरुखी रवैये के चलते किसानों में व्यापक रोष है। इसके चलते किसान आंदोलन के समर्थकों ने नरवाना के लघु सचिवालय के बाहर भी धरना शुरू कर दिया है।
सचिन मोर, अंकुश, डॉ. दलशेर, डॉ. राममेहर, शमशेर अंबरसर, यशपाल धरौदी, रणधीर डूमरखां, एडवोकेट मानव ने कहा कि सरकार किसानों की बात सुनने की बजाय उन पर लाठियां बरसा रही है। जिसकी जितनी निंदा की जाए उतनी कम है। जब सरकार को यह लगता है कि किसानों की संख्या कम है और वह विरोध कर रहे हैं तो उन पर लाठियां बरसाई जाती हैं और जब किसान एकत्रित होते हैं तो उनके आंदोलन को उग्र करने का प्रयास किया जाता है। धरनारत लोगों ने कहा कि भाजपा सरकार लोकतंत्र की हत्या करके देश पर राज करना चाहती है। लेकिन जब तक इस देश का गरीब किसान मजदूर जिंदा है तब तक सरकार के तानाशाही का विरोध जारी रहेगा। रही बात कृषि कानूनों की तो उसके लिए किसान कई वर्षों तक आंदोलन चलाने के लिए तैयार हैं।