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प्राइवेट मंडी कानून के खिलाफ उठाई आवाज

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तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली में संसद के समानांतर चल रही किसान संसद में मंगलवार को टीकरी बार्डर से 25 किसान शामिल हुए। यहां से गए आंदोलनकारियों के प्रतिनिधियों ने जंतर-मंतर के पास हुए किसान संसद के सत्र में हुई चर्चा में भाग लिया और तीनों कानूनों के अलावा बिजली बिल संशोधन 2020 को भी निरस्त करने की मांग की।
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ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन की प्रदेश कमेटी सदस्य रोहतास कुमार सैनी के नेतृत्व में बस्तीराम, सुखबीर सिंह, नरसिंह व संदीप कुमार भी मंगलवार को हुई किसान संसद में शामिल हुए। उन्होंने तीन कृषि कानूनों व बिजली बिल संशोधन 2020 को रद्द करने और एमएसपी को कानूनी दर्जा देकर फसल खरीद की गारंटी देने की मांग पर हुई किसान संसद की बैठक में भाग लिया।
चर्चा में भाग लेते हुए रोहताश कुमार सैनी ने कहा कि ये कानून किसानों के हित में नहीं हैं। ये कॉरपोरेट घरानों के हित में हैं। आवश्यक वस्तु कानून में संशोधन कर छह जरूरी चीजों-तमाम अनाज, दालों, आलू, खाद्य तेल और तिलहन की स्टॉक लिमिट खत्म कर जमाखोरी व कालाबाजारी की खुली छूट दे दी गई है। इससे बेतहाशा महंगाई बढ़ेगी। जिससे किसानों के साथ-साथ ग्रामीण व शहरी तमाम जनता को भुखमरी के संकट में धकेल दिया जाएगा।
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सुखबीर सिंह ने कहा कि नए मंडी कानून में मौजूदा मंडियों के समानांतर प्राइवेट मंडियों का जाल फैलाने की बेरोकटोक छूट दी गई है। इससे कृषि उपज की तमाम खरीद बेच पर बड़े पूंजीपतियों व प्राइवेट कंपनियों का पूर्ण नियंत्रण कायम हो जाएगा। ये खुद मनमर्जी के भाव तय करेंगी। पूरा थोक व खुदरा व्यापार इनकी मुट्ठी में होगा। किसान तो बुरी तरह से मारा जाएगा। कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग अर्थात अनुबंध खेती के कानून में बड़ी कंपनियां किसानों से अपनी पसंद की खेती कराएंगी। अपने ही खेत में किसान उनका मुजारा बनकर रह जाएगा। नरसिंह ने कहा कि बिजली बिल संशोधन द्वारा बिजली पूरी तरह से प्राइवेट कंपनियों के हाथ में आ जाने से सब्सिडी खत्म हो जाएगी। इससे सिंचाई बेतहाशा महंगी होने से खेती का लागत खर्च बढ़ जाएगा और गरीब लोग बिजली से वंचित हो जाएंगे।
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