बहादुरगढ़ रोहतक लोकसभा क्षेत्र के अधीन आती है जहां साढ़े तीन महीने पहले हुए चुनाव में कांग्रेस से दीपेंद्र हुड्डा सांसद बने थे। हुड्डा को बहादुरगढ़ से काफी बढ़त मिली थी। राजेंद्र की सबसे बड़ी उम्मीद की वजह भी यही है। वहीं, भाजपा प्रत्याशी दिनेश कौशिक पीएम नरेंद्र मोदी के नाम व जाट और गैर जाट विभाजन वोटों के सहारे विधानसभा जाने का रास्ता खोज रहे हैं।
दूसरी तरफ इनेलो-बसपा उम्मीदवार शीला राठी भी उम्मीद जता रही हैं कि पूर्व विधायक नफे सिंह राठी की हत्या के बाद बने हालात में जनता उनके प्रति सहानुभूति दिखाएगी। निर्दलीय प्रत्याशी राजेश जून ने 2014 में निर्दलीय ताल ठोककर 28 हजार 432 वोट पाए थे।
इसी के भरोसे वे पार्टी प्रत्याशियों को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। वे पिछले डेढ़ साल से प्रचार में जुटे हैं। किसान नेता रमेश दलाल का वर्चस्व भी कई गांवों में दिखाई देता है। बड़े किसान नेता के रूप में उनकी पहचान है। इन पांच प्रत्याशियों में कौन बाजी मारेगा, यह अभी कहना मुश्किल है लेकिन इतना जरूर तय है कि यहां जीत की नैया कैडर वोट के सहारे ही पार होती दिख रही है।
वहीं नई बस्ती निवासी राजेंद्र कुमार का दावा है कि बहादुरगढ़ वासियों को मूलभूत सुविधाएं भी नसीब नहीं हो रही हैं। क्षेत्र में बिजली, पानी और सड़कों की हालत खस्ता है। शिकायतों के बावजूद अधिकारियों द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जाता। वर्तमान विधायक भी आमजन की समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं देते।
जाटों की संख्या ज्यादा
बहादुरगढ़ यूं तो जाट बहुल क्षेत्र है, लेकिन एससी, बीसी, बनिया व पंजाबी भी कम नहीं हैं। जाट मतदाताओं की संख्या 98 हजार व ब्राह्मण की 24 हजार हैं। अनुसूचित जाति के वोटर 34 हजार, पिछड़ा वर्ग के 38 हजार, बनिया 18 हजार, पंजाबी 12 हजार, मुस्लिम 10 हजार और प्रवासी मतदाताओं की संख्या लगभग 8 हजार है।