किसान रबी फसल की बिजाई के लिए तैयारियों में जुट गए हैं। अक्तूबर माह का मध्य चल रहा है और किसानों को डीएपी खाद नहीं मिल रहा। सरसों की बिजाई का समय चल रहा है। डीएपी खाद नहीं मिलने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें नजर आने लगी हैं। अभी तक सहकारी समितियों में डीएपी के मात्र 380 बैग पहुंचे हैं जबकि निजी दुकानों पर भी डीएपी नहीं मिल रहा।
बादली सहकारी समिति के अधीन आने वाले करीब 24 गांवों के किसान बहुत परेशान और चिंतित हैं।सरसों की बिजाई शुरू हो चुकी और डीएपी मिल नहीं रहा। बादली पैक्स केंद्र को छोड़ दिया जाए तो गुभाना, पेलपा, खेड़ी जट्ट के किसी केन्द्र पर डीएपी नहीं है। एक ओर खेतों में सरसों की तैयारी हो चुकी है और बिजाई के लिए डीएपी का इंतजार है। दूसरी ओर डीएपी नहीं मिलने से बिजाई में देरी हो रही है। बादली, पेलपा, गुभाना, माजरी, लुकसर, खेड़ी जट्ट और जहांगीरपुर के किसान प्रवीन, दीपक, सचिन, दिलबाग, समुन्द्र और पवन ने बताया कि सोसाइटियों में डीएपी न होने से वह हताश हैं। किसान निजी दुकानदारों के पास स्टाक ढूंढने का भी प्रयास कर रहे हैं, ताकि कहीं से भी खाद का जुगाड़ हो और अपनी खेती को बचा सके। सोसाइटी में किसान खाद पता करने के लिए आते हैं, लेकिन उन्हें खाली हाथ ही लौटना पड़ रहा है। किसानों के इस मुद्दे पर पूरे प्रदेश में राजनीति भले ही जोर पकड़ रही, लेकिन किसानों की समस्या जस की तस बनी हुई है। सभी इलाकों में किसानों को खाद की किल्लत की समस्या से जूझना पड़ रहा है। अब भी यूरिया व डीएपी की किल्लत है।
किसानों का कहना है कि अधिक बारिश और जलभराव के चलते खरीफ की खेती पूरी तरह से नष्ट हो गई है। कुछ जगहों पर अब पानी निकलने से रबि फसल की तैयारी हुई है लेकिन अब डीएपी किल्लत ने किसानों पर दोहरी मार डाल दी है। अगले एक सप्ताह में डीएपी नहीं मिला तो सरसों बिजाई में भी देरी हो जाएगी। ऐसे में किसानों पर प्राकृतिक आपदा के बाद अब डीएपी किल्लत के तौर पर नई आपदा टूट गई है।
पिछले कई दिनों से डीएपी की मांग के लिए किसानों की भीड़ पहुंच रही है लेकिन सोमवार की देर रात पैक्स पर 380 बैग आए हैं। मंगलवार को बैग वितरित किए गए लेकिन ज्यादा भीड़ होने के चलते डीएपी पर्याप्त नहीं है। ऐसे में किसानों को भी शांत किया जा रहा है। जल्द ही दूसरी यूनिट भी पहुंच जाएगी। किसानों को चाहिए कि वह स्टॉक न करे क्योंकि डीएपी पहुंचना शुरू हो गया है। -वजीर सिंह, पैक्स प्रबंधक