केएमपी एक्सप्रेस वे के साथ-साथ प्रस्तावित हरियाणा आर्बिटल रेल कॉरिडोर के मामले में सोमवार को कमिश्नर ने जमीन के अवार्ड की सुनवाई की। इस अवसर पर सैकडों की संख्या में लगभग 17 गांवों के किसान लघु सचिवालय में पहुंचे। इस दौरान किसान नेता रमेश दलाल के नेतृत्व में आए किसानों ने बताया कि बेशकिमती जमीन को रेल ऑर्बिटल कॉरिडोर के लिए कोडियों के भाव में नहीं देंगे।
सोमवार को कमिश्नर एसके वर्मा की कोर्ट में मुआवजे की सुनवाई के लिए किसान पहुंचे। रेल ऑर्बिटल कॉरिडोर की करीब 250 एकड़ जमीन के मुआवजे को लेकर पिछले 10 महीनों से किसान माडोठी टोल प्लाजा पर आंदोलन कर रहे हैं।
भारत भूमि बचाओं संघर्ष समिति की ओर से निर्णय लिया गया है कि 17 गांवों की भूमि जोकि रेल कॉरिडोर के लिए रेलवे विभाग की ओर से अधिग्रहित की जाएगी, उस जमीन का किसानों को 10 करोड़ रुपये प्रति एकड़ दिया जाए। जिसको लेकर भारत भूमि बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष नेता रमेश दलाल सैकड़ों लोगों के साथ सोमवार को लघु सचिवालय में पहुंचे, पिछले 10 महीने से टोल पर 17 गांव के किसान धरना प्रदर्शन कर 10 करोड़ के मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
किसानों ने बताया कि सरकार की ओर से किसी जमीन का 80 लाख तो किसी का 90 लाख रुपये मुआवजे का तय किया गया है, जिससे किसान संतुष्ट नहीं है। किसानों की मांग है कि उनको 10 करोड़ रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा दिया जाए। इस दौरान किसान नेता रमेश दलाल ने बताया कि यदि उनकी मांग मान ली जाती है तो ठीक नहीं तो वह हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाएंगे।
उन्होंने बताया कि मांडोठी टोल पर पिछले 10 महीने से किसान अपनी मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं और यदि उनकी मांगें नहीं मानी जाती है तो उनका धरना प्रदर्शन आगे भी जारी रहेगा।
किसान दिलबाग सिंह दलाल, संदीप दलाल, चांद सिंह, सतपाल बुपनिया, कृष्ण, सतीश माडोठी, सतपाल ने बताया कि उनको यदि दस करोड़ रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से जमीन का मुआवजा नहीं दिया गया तो किसान नेता रमेश दलाल के नेतृत्व में हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट की शरण में जाने से पीछे नहीं हटेंगे।