हरियाणा के बहादुरगढ़ शहर के फाइनेंसर दयानंद उर्फ मुकेश की हत्या का नौ महीने के बाद खुलासा हो गया है। दयानंद की हत्या शहर के किला मोहल्ला निवासी एक व्यक्ति और उसके नाबालिग बेटे ने की थी। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया है।
गांव मेहंदीपुर डाबोदा निवासी दयानंद उर्फ मुकेश शहर के झज्जर रोड पर फाइनेंस का ऑफिस चलाता था। 15 अगस्त 2021 को उसकी चाकू गोदकर हत्या कर दी गई थी। बाद में शव को बालोर गांव के श्मशान घाट में फेंक दिया गया था। इस वारदात को सुलझाने के लिए पुलिस की टीमें लगी हुई थीं, मगर आरोपियों के बारे में कोई सुराग नहीं लग पा रहा था।
शुक्रवार को सीआईए-2 बहादुरगढ़ में पत्रकार वार्ता के दौरान पुलिस अधीक्षक वसीम अकरम ने बताया कि तीन दिन पहले जब बहादुरगढ़ पुलिस की एक टीम बिना नंबर वाले वाहनों की जांच कर रही थी तो उस दौरान एक बिना नंबर की मोटरसाइकिल को जांच के लिए रोका गया। नंबर के स्थान पर केवल हरियाणा लिखा था।
बाद में पुलिस मोटरसाइकिल चलाते मिले किशोर व मोटरसाइकिल को थाने ले आई। पूछताछ की गई तो पता चला कि मोटरसाइकिल दयानंद उर्फ मुकेश की थी, जिसकी हत्या करके शव को बालोर गांव के श्मशान घाट परिसर में फेंक दिया गया था।
इस संबंध में दयानंद उर्फ मुकेश के परिजनों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि वारदात के बाद मोबाइल फोन और बाइक गायब थी। दयानंद की बाइक के साथ पकड़े गए किशोर से पूछताछ की गई तो उसने वारदात का खुलासा किया। तब पुलिस ने किशोर के पिता महेश को भी गिरफ्तार कर लिया। एसपी वसीम अकरम ने बताया कि दयानंद उर्फ मुकेश फाइनेंस का काम करता था और उसने किला मोहल्ला निवासी महेश को 20-25 हजार रुपये उधार दिए थे।
15 अगस्त को दयानंद उर्फ मुकेश आरोपी से पैसे लेने लिए ऑटो मार्केट स्थित उसकी दुकान में गया था। इस दौरान इनमें कहासुनी हो गई। शाम को करीब साढ़े छह बजे आरोपियों महेश व उसके नाबालिग बेटे ने अपनी दुकान के अंदर बंद करके दयानंद की चाकू गोदकर हत्या कर दी।
चाकू से सात वार किए गए थे। मौत होने के बाद रात करीब 11 बजे शव को मोटरसाइकिल पर रख बालोर गांव के श्मशान घाट परिसर में फेंक आए। तीन दिन बाद लोगों ने देखा तो पुलिस को सूचना दी। पकड़े गए आरोपियों को शुक्रवार को न्यायालय में पेश किया गया। महेश को पूछताछ के लिए न्यायालय से रिमांड पर लिया है और उसके नाबालिग बेटे को बाल सुधार गृह में भेज दिया गया है।