बहादुरगढ़। काफी वर्षों से पूर्ण उत्तरी बाईपास की मांग को लेकर संघर्ष समिति द्वारा किया गया संघर्ष पूरा होने जा रहा है। करीब 400 करोड़ की लागत से दो फेस में बाईपास बनाने के लिए कार्य सांखोल-बराही रोड से शुरू हो चुका है। इसी खुशी में संघर्ष समिति से जुड़े लोगों ने बामडोली मोड़ लाइनपार संघर्ष स्थल पर यज्ञ करके खुशी जाहिर की और ग्रेटर बहादुरगढ़ के लिए संघर्ष करने का फैसला लिया।
रविवार को समिति अध्यक्ष सतीश छिकारा, आर्य बलजीत, हरबीर व प्रमोद आर्य आदि सदस्यों ने यज्ञ में आहुति देकर क्षेत्र में उत्तरी बाईपास की बड़ी सौगात के लिए खुशी जाहिर की। सतीश छिकारा ने कहा कि बाईपास सहित कई मांगों के लिए 2017 में एक दिन धरना देकर लोगों को जागरूक किया। उनकी मांगों में पूर्ण उत्तरी बाईपास का निर्माण, अवैध कालोनियों का विकास और रेलवे अंडरपास का निर्माण की मांग शामिल थीं। इसके लिए चलाए गए अभियान में एक लाख से अधिक लोगों ने सहमति हस्ताक्षर किए। बामडोली मोड़ पर 54 दिन लगातार शांतिप्रिय धरना दिया गया और आखिरी के 11 दिन सतीश छिकारा समेत 10 लोगों ने दिनरात अनशन किया। पीएम व सीएम मनोहर लाल को पत्र लिखे। इसी दौरान सरकार ने बाईपास की मुख्य मांग और आधी से ज्यादा कालोनियों को पास करने की घोषणा की। इस सफलता के लिए रविवार को समिति सदस्यों ने पूर्ण आहुति दी और सरकार का आभार जताया।
यज्ञ में आहुति देकर सतीश छिकारा और उनके साथियों ने पूरे क्षेत्र के विकास के लिए संघर्ष करने का संकल्प लिया और कहा कि जब नोएडा के साथ ग्रेटर नोएडा बन सकता है तो बहादुरगढ़ के साथ ग्रेटर बहादुरगढ़ क्यों न बने? इसके लिए समिति संघर्ष करेगी। दिल्ली से सटे इस क्षेत्र में ग्रेटर बहादुरगढ़ बनने की पूरी संभावनाएं हैं। ग्रेटर बहादुरगढ़ बना तो रिहायशी व बड़ी औद्योगिक इकाइयां स्थापित होंगी, रोजगार बढ़ेंगे। चेयरमैन करतार, पुरुषोत्तम कानोन्दा, एडवोकेट रामफूल, राजसिंह दलाल, रामबीर, सूबे ऑडिटर, जगबीर, प्रीत, राजेंदर, राम रतन पहलवान व जोधा पार्षद ने भी यज्ञ में आहुति दी।