अनुच्छेद 370 जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा, जिसे 7 अक्तूबर 1949 को लागू किया गया था। इस अनुच्छेद के तहत जम्मू-कश्मीर का अलग संविधान, अलग झंडा व अलग कानून आदि हुए। इससे राज्य को विशेष दर्जा मिला था। 5 अगस्त 2019 को भारत सरकार ने इसे निरस्त कर दिया, जो कि ऐतिहासिक फैसला था। जब तक यह अनुच्छेद अस्तित्व में था, तब तक राज्य में अशांति फैली हुई थी। वहां के युवाओं द्वारा सेना पर पथराव व भारत विरोधी नारे आम बात थी।
इस कारण राज्य में विकास कारणों का अभाव था। लेकिन अनुच्छेद के निरस्त होने के बाद, राज्य में प्रमुख बदलाव आए जैसे कि पथराव की घटनाओं में कमी आई व निवेश में बढ़ोतरी हुई। लाल चौक पर किसी ने तिरंगा फैराने के बारे में सोचा नहीं था, वहां अब देश का झंडा शान से लहरा रहा है। लोगों की सुचारू रूप से आवाजाही प्रमुख चीजें हैं जो बता रहीं हैं कि जम्मू-कश्मीर में शांति स्थापित हो रही है। जो युवा पहले सेना पर पथराव करते वही अब सेना में शामिल हो रहे हैं।
जो कश्मीरी पंडित अशांति के चलते राज्य छोड़कर चले गए थे वो अब वापस घाटी में लौट रहे हैं। वहीं आतंकवादी घटनाओं में भी कमी आई है। यह सब अनुच्छेद 370 के उन्मूलन के बाद ही संभव हो पाया है। जम्मू-कश्मीर में जी-20 की बैठक होना भी राज्य में शांति बहाली की ओर संकेत कर रहा है। इसलिए हम कह सकते हैं कि अनुच्छेद 370 को उन्मूलन जम्मू-कश्मीर में शांति बहाली के लिए एक ठोस कदम है। -पवन कुमार, गांव सातरोड़ खुर्द, हिसार