हिसार। हिसार की कंपनियों में तैयार किए गए उत्पाद करीब 40 देशों में पहुंच रहे हैं। ये कंपनियां हर साल 1300 करोड़ का निर्यात कर रही हैं। इसमें स्टील के उत्पाद सबसे अधिक भेजे जा रहे हैं। इसके अलावा हिसार के कॉटन के धागे और बटन भी विदेशों में पसंद किए जा रहे हैं। निर्यातकों को कोरोना के बाद फिर से उसी अनुपात में ऑर्डर मिलने लगे हैं।
क्वॉलिटी फाइल्स सेल्स एंड मार्केटिंग मैनेजर अशोक शर्मा ने बताया कि यूएसए, यूके, श्रीलंका, जर्मनी में उनके प्रोडक्ट जाते हैं। लोहे से तैयार उत्पाद फार्मास्यूटिकल, इंडट्रीज और ऑटो मोबाइल में उपयोग होते हैं। जिंदल पॉली बटन कंपनी के क्वालिटी मैनेजर सुरेश कालीरामना, एक्सपोर्ट मैनेजर विवेक जैन ने बताया कि उनके कुल उत्पाद का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा बांग्लादेश, श्रीलंका, हांगकांग, चीन, वियतनाम समेत अन्य देशों में निर्यात है। यूरोप के देशों में करीब 40 करोड़ रुपये का कारोबार करते हैं। यूरोप के बड़े ब्रांड कंपनियों के साथ एमओयू है। उनके बटन पॉलीस्टर, मेटल से तैयार होते हैं।
रावलवासिया इस्पात उद्योग के जीएम संजय जिंदल, मैनेजर विकास ने बताया कि अफ्रीका में उनकी कंपनी के उत्पाद निर्यात होते हैं। जिसमें इथोपिया, फ्रांस, यूरेनिया, मोजंबिक से हर साल करीब 15 करोड़ का कारोबार होता है। उनके स्टील उत्पाद घरेलू व इंडस्ट्रीज में उपयोग होते हैं। उन्होंने बताया कि अब कोरोना का अधिक असर नहीं बचा है। पहले की तरह से कंपनियों की ऑर्डर मिलने लगे हैं।
एचपी कॉटन के यूनिट हेड एसके शाह ने बताया कि एचपी कॉटन जापान, यूएसए, स्पेन, डेनमार्क, नीदरलैंड , रसिया, फ्रांस, पौलेंड सहित 40 देशों में उनके उत्पाद निर्यात होते हैं। 1985 से उनकी कंपनी काम कर रही है। जो करीब 850 तरह के उत्पाद बनाती है। करीब 100 से 120 करोड़ रुपये का कारोबार विदेशों के साथ होता है। कुल उत्पाद का 30 से 40 प्रतिशत निर्यात होता है। हर साल औसतन 1200 से 1300 मीट्रिक टन धागा निर्यात करते हैं।
हिसार मेटल के मैनेजर ऑपरेशन दीपक वधवा ने बताया कि उनकी कंपनी लोहे के उत्पाद तैयार करती है। जो पेट्रो ,इंडस्ट्री, ऑटो मोबाइल क्षेत्र में उपयोग होते हैं। उनका सबसे अधिक उत्पाद स्विटजरलैंड, जर्मनी, पौलेंड में जाता है। हर साल करीब 5 करोड़ रुपये का कारोबार विदेशों से होता है।