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प्रदेश में ढाई हजार करोड़ रुपये के मत्स्य उत्पादन को अगले दो वर्षों में दोगुना करने का लक्ष्य : दलाल

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विश्व मत्स्य दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे कृषि एवं पशुपालन, मत्स्य मंत्री अधिकारियों से ? - फोटो : Hisar
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सिवानी मंडी। प्रदेश के वर्तमान में ढाई हजार करोड़ रुपये के मत्स्य उत्पादन को अगले दो वर्षों में 5 हजार करोड़ करने का लक्ष्य है। मत्स्य पालन के क्षेत्र में किसानों की आय और रोजगार बढ़ाने के लिए उत्पादन, उत्पादकता व क्षेत्र को दोगुना करना है। यह कहना है प्रदेश के कृषि एवं पशुपालन व मत्स्य मंत्री जेपी दलाल का।
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वह रविवार को श्री कृष्णा प्रणामी धर्मशाला में मत्स्य पालन विभाग की तरफ से विश्व मत्स्य दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने मत्स्य विभाग द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। कार्यक्रम में मत्स्य पालन एवं खेल विभाग के प्रधान सचिव अशोक खेमका व निदेशक धर्मेंद्र बुधवार मौजूद रहे।
कृषि मंत्री ने कहा कि मत्स्य पालन का व्यवसाय करके किसान अपनी स्थिति को और अधिक सुदृढ़ कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि वे कृषि के साथ-साथ इस व्यवसाय को अपनाकर प्रदेश में नीली क्रांति को बढ़ावा देने के लिए आगे आएं। राज्य सरकार द्वारा मत्स्य पालक किसानों को विभिन्न प्रकार की सुविधाएं मुहैया करवाई जा रही हैं। उन्होंने ने कहा कि प्रदेश की दस लाख एकड़ बंजर भूमि पर मछली पालन से आय बढ़ाने व रोजगार की अपार संभावनाएं है। इसलिए राज्य सरकार प्रदेश में ऐसी जमीन पर मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए कारगर कदम उठा रही है।
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रेतीले क्षेत्र में झींगा मछली पालन करें
कृषि मंत्री ने कहा कि इस रेतीले क्षेत्र में झींगा मछली पालन की अपार संभावनाएं हैं। किसान खारे पानी के क्षेत्र में मत्स्य पालन के व्यवसाय को अपनाकर लाखों कमा सकते हैं। राज्य सरकार मत्स्य पालन से जुड़ी विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत सामान्य वर्ग के मत्स्य पालक किसानों को 40 प्रतिशत और अनुसूचित जाति के किसानों को 60 प्रतिशत तक अनुदान दे रही है।
मत्स्य उत्पादन में पंजाब को पीछे छोड़ा : खेमका
मत्स्य पालन एवं खेल विभाग के प्रधान सचिव अशोक खेमका ने कहा कि प्रदेश के किसानों ने सरकार द्वारा प्रदत्त की जा रही सुविधाओं का लाभ उठाकर मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में पंजाब को भी पीछे छोड़ दिया है। मत्स्य पालक किसानों के लिए सरकार सभी प्रकार की मूलभूत सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए वचनबद्ध है।
मत्स्य यूनिट स्थापित करने का दिया लक्ष्य
विभाग के निदेशक धर्मेंद्र बुधवार ने बताया कि प्रदेश में मत्स्य पालन को और अधिक बढ़ाने के लिए सभी जिला मत्स्य अधिकारियों को 31 मार्च तक मत्स्य यूनिट स्थापित करने के लक्ष्य दिए गए। उन्होंने कहा कि मत्स्य विभाग का बजट वर्ष 2014-15 में 6.9 करोड़ रुपये था, जो वर्ष 2021-22 में बढ़कर 124.59 करोड़ रुपये हो गया है। मत्स्य पालन के लिए महिलाओं व एससी श्रेणी को 60 प्रतिशत और सामान्य श्रेणी को 40 प्रतिशत की सब्सिडी दी जाती है। वर्ष 2020-21 के दौरान प्रदेश में लगभग 45519 एकड़ भूमि में मत्स्य पालन किया गया है और इसी वर्ष के दौरान 2925.31 लाख मत्स्य बीज संचय किया गया है, जिससे 2.03 लाख टन मत्स्य उत्पादन किया गया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2020-21 के दौरान प्रदेश में 1440 लाख झींगा पालन बीज संचय किया गया है, जिससे 3120 मीट्रिक टन सफेद झींगा उत्पादन किया गया है। निदेशक ने कहा कि प्रदेश में वर्ष 2020-21 के दौरान लगभग 1232.50 एकड़ भूमि में झींगा पालन किया गया जबकि पंजाब में 850 एकड़ भूमि में इसका पालन किया गया है।
इस अवसर पर लाहली से मत्स्य संस्थान से डॉ. हरिकृष्ण, सीसीएस एचएयू हिसार से डॉ. रचना गुलाटी, एसडीएम जगदीश चंद्र, विभाग के संयुक्त निदेशक पाल राठी, उप निदेशक ईश्वर सिंह, उप निदेशक पवन कुमार, जिला मत्स्य पालन अधिकारी सिकंदर सांगवान, उद्योगपति राजेश केडिया, पूर्व मार्केट कमेटी चेयरमैन अनिल झाझडिया, नपा प्रधान सुरेश खटक, सुनील, संजय राहाड़, किसान सुनील लाठर, लाल सिंह, रमेश पोपली, रोहतास श्योराण आदि मौजूद रहे।
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