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भाटला सामाजिक बहिष्कार मामला: पुलिस ने जिन आरोपियों को दी थी क्लीन चिट, कोर्ट ने जारी किए उनके अरेस्ट वारंट

Sun, 08 Aug 2021 02:51 PM IST
निवेदिता वर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, हांसी (हरियाणा)

सार

भाटला गांव में 2017 के जुलाई नलकूप पर पानी भरने को लेकर स्वर्ण समुदाय और अनुसूचित जाति के लोगों के बीच विवाद हो गया था।
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अदालत
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विस्तार
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हांसी उपमंडल के बहुचर्चित भाटला सामाजिक बहिष्कार के मामले में जिन आरोपियों को पुलिस ने अपनी जांच में क्लीन चिट दी थी, उन्हीं छह आरोपियों के खिलाफ हिसार की स्पेशल कोर्ट ने अरेस्ट वारंट जारी कर दिए हैं। एसपी के मार्फत अरेस्ट वारंट जारी किए गए हैं। 

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भाटला गांव में 2017 के जुलाई नलकूप पर पानी भरने को लेकर स्वर्ण समुदाय और अनुसूचित जाति के लोगों के बीच विवाद हो गया था। आरोप है कि इसके बाद स्वर्ण समुदाय की तरफ से गांव में मुनादी करवाई गई कि अनुसूचित जाति के लोगों का सामाजिक बहिष्कार किया जाता है और इनसे किसी प्रकार के सामाजिक संबंध रखने वालों पर दंड लगाया जाएगा। 


इस मामले में अजय भाटला और 28 अन्य लोगों की तरफ से एफआइआर दर्ज करवाई गई थी। शिकायतकर्ताओं ने स्वर्ण जाति के 7 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया था, लेकिन पुलिस ने जांच में छह लोगों को क्लीन चिट दे दी। इसके बाद पीड़ित पक्ष ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए हिसार में स्थापित विशेष अदालत की शरण ली और याचिका दायर कर अन्य आरोपितों को शामिल जांच करने की मांग की। 
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कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए अन्य आरोपियों को समन जारी किए थे, जिसके खिलाफ आरोपी पक्ष हाईकोर्ट में चला गया। हाईकोर्ट द्वारा वर्ष 2018 में याचिका पर सुनवाई करते हुए छह आरोपियों के खिलाफ आगामी आदेशों तक किसी तरह की कार्रवाई पर स्टे लगा दिया था। 

पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता रजत कलसन ने बताया कि इसके बाद कोरोना की वजह से हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई नहीं हो पाई। कुछ दिनों पहले ही उन्होंने हिसार की कोर्ट में सुप्रीम कोर्ट का एक आदेश का हवाला देते हुए मामले में जल्द कार्रवाई की प्रार्थना की थी। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के अनुसार हाईकोर्ट द्वारा जारी स्टे 6 महीने की अवधि के बाद प्रभावी नहीं रहेंगे। हिसार की स्पेशल कोर्ट ने सुनवाई के बाद छह आरोपियों के खिलाफ एसपी के मार्फत अरेस्ट वारंट जारी करने का आदेश दे दिए हैं।

मुआवजा भी नहीं मिला पूरा
भाटला सामाजिक बहिष्कार के पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें सरकार की तरफ से पूरा मुआवजा भी नहीं दिया गया। केवल कुछ लोगों को ही मुआवजा दिया गया जबकि गांव में रहने वाले अनुसूचित जाति के सभी लोग पीड़ित थे। इस मामले में भी पीड़ित पक्ष ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की हुई है और मामला विचाराधीन है।                                       

भाटला के कई मामले कोर्ट में विचाराधीन
भाटला गांव में दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से जातीय विवाद चल रहा है और दोनों पक्षों की तरफ से कई मामले कोर्ट में विचाराधीन हैं। पिछले दिनों पुलिस द्वारा भाटला में अनुसूचित जाति के शोषण के मामले में ही एक आरोपी को कोर्ट के आदेशों पर गिरफ्तार किया गया।  

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