सरकारी ब्लड बैैंक में ग्रुप ए व बी पॉजिटिव का स्टॉक खत्म, गंभीर हालत में मरीज रेफर
हिसार। भले ही सामाजिक संस्थाओं द्वारा रक्तदान शिविर लगाए जा रहे हो। बावजूद इसके शनिवार को सामान्य अस्पताल परिसर स्थित ब्लड बैंक में ग्रुप ए व बी पॉजिटिव रक्त का स्टॉक खत्म हो गया। रक्त स्टॉक खत्म होने से अनेक मरीजों की जान पर बन आई। एक गर्भवती महिला को साढे़ पांच ग्राम खून होने पर गंभीर हालत में अग्रोहा मेडिकल रेफर किया गया। परिजन उसकी गंभीर हालत को देखते हुए निजी अस्पताल लेकर गए। मरीज के परिजनों ने निजी अस्पताल या मेडिकल से ब्लड लाने की बात कहीं मगर चिकित्सक ने बाहर से लाया ब्लड मरीज को देने से इंकार कर दिया। हालांकि अधिकारियों से ऐसी किसी समस्या से इंकार करते हुए जांच की बात कहीं है।
शनिवार दोपहर को महिला रोग विशेषज्ञ चिकित्सक ने रक्त नहीं मिलने पर गर्भवती महिला को रेफर कर अपना पल्ला झाड़ लिया। उस समय डाबड़ा गांव से आई गर्भवती रमा की हालत गंभीर थी। परिजनों को गर्भवती को डिलीवरी के लिए अग्रोहा की बजाय निजी अस्पताल में लेकर जाना पड़ा। ब्लड बैंक में शनिवार को ग्रुप ए व बी पॉजिटिव ब्लड खत्म हो चुका है और नोटिस बोर्ड पर लिखा हुआ था। शनिवार को ब्लड लेने 4 से 5 मरीज पहुंचे। इन सभी मरीजों को निजी ब्लड बैंक से रक्त का इंतजाम करना पड़ा।
परिजनों का आरोप है कि अधिकारी आशा वर्करों पर अपने एरिया की गर्भवती की सरकारी अस्पतालों में डिलीवरी कराने का दबाव देते है। जब अस्पताल में आते है तो कोई सुविधा नहीं मिलती है। मरीज को भी परेशानी झेलनी पड़ती है। सरकारी अस्पताल में सिफारिश पर ही मरीज को इलाज मिलता है, बाकी को चक्कर लगाने पड़ते है। गर्भवती रमा के परिजनों का आरोप है कि वह पीएमओ व सीएमओ के ऑफिस में गए थे, पर वहां कोई नहीं मिला। वहीं पीएमओ का कहना है कि उनके पास कोई शिकायत लेकर नहीं आया।
20 से 25 हजार आएगा खर्चा
गर्भवती रमा के भाई डाबड़ा गांव निवासी हेमंत ने बताया कि कुछ दिनों से उसकी बहन यहां मायके में आई हुई थी और उसकी ससुराल जींद के खेम नगर में है। शनिवार सुबह रमा को प्रसव पीड़ा हुई तो वह आशा वर्कर के साथ जिला अस्पताल में पहुंचे। यहां आने के बाद चिकित्सकों ने रमा के सभी टेस्ट करवाएं। रिपोर्ट में रमा में साढ़े 5 ग्राम खून मिला। अस्पताल में ब्लड था नहीं। उसने अग्रोहा मेडिकल कॉलेज लैब में ब्लड का पता कर ब्लड लाने की बात कही। चिकित्सकों ने मना कर दिया और कहा कि वहां से लाने पर ब्लड के सेल टूट जाएंगे। जब निजी लैब से ब्लड लाने को कहा तो मरीज को देने से मना कर दिया। यह कहकर गर्भवती रमा को अग्रोहा के लिए रेफर कर दिया। रमा की हालत गंभीर थी, जिससे उसे बस स्टैंड नजदीक निजी अस्पताल में दाखिल करवाया। यहां 20 से 25 हजार रुपये का खर्चा आएगा । वह गरीब परिवार से है।
वर्जन
मेरे पास इस बारे में कोई शिकायत नहीं आई है। अगर ऐसी कोई बात है तो उसका पता लगाया जाएगा। मामले की जांच की जाएगी। ब्लड बैंक सीएमओ मैडम के दायरे में आता है।
डॉ. गोविंद गुप्ता, पीएमओ, नागरिक अस्पताल, हिसार।