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बूंद-बूंद पानी वाली बागवानी और पॉली हाउस से हर साल 10 लाख रुपये कमा रहे परविंद्र

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हिसार। गांव प्रभुवाला निवासी परविंद्र भाटिया अपने खेत की फसल के साथ। - फोटो : Hisar
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हिसार। खेती में घाटा व सिंचाई के लिए पानी की कमी को लेकर परेशान किसानों के लिए गांव प्रभुवाला के किसान परविंद्र भाटिया उदाहरण हैं। परविंद्र ने पारंपरिक खेती को बागवानी और सब्जी उगाकर व्यावसायिक बना दिया। एक दशक पहले तक पानी की कमी व मौसम की मार के चलते जो खेती घाटे का सौदा थी, आज वह हर साल 10 लाख रुपये का लाभ दे रही है।
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परविंद्र ने हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के वैज्ञानिकों की सलाह पर अपने खेत में पॉली हाउस बनाकर उसमें लाल, पीली व हरी शिमला मिर्च उगाई। वहीं आम, किन्नू, अनार, नींबू आदि के बाग लगाए। गर्मी के लिए खास खीरा, खरबूजा व तरबूज से भी अच्छी आमदनी होती है। खास बात यह है कि पेड़ व पौधों की सिंचाई के लिए बूंद-बूंद पानी (टपका विधि) का उपयोग होता है। तैयार सब्जी व फल को स्थानीय व्यापारी खरीद लेते हैं।
परविंद्र भाटिया ने बताया कि उनके पास 28 एकड़ जमीन है। वह भी पहले पारंपरिक तरीके खेती करते थे। नरमा व गेहूं की खेती कभी मौसम की मार तो कभी बीमारी के चलते घाटे का सौदा बनती जा रही थी। इसके साथ ही पानी की लागत बहुत थी और नहरी पानी व ट्यूबवेल से इसकी पूर्ति नहीं हो पा रही थी। वर्ष 2004 में उन्होंने खेती में नए प्रयोग शुरू किए। इसके लिए कृषि विशेेषज्ञों से मिले। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय जाकर विशेषज्ञों से सलाह ली और पहले फलों व बाद में सब्जी की खेती शुरू की।
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नई विधियों, बीजों से मिला फायदा
परविंद्र भाटिया ने कहा कि किसान बाजार की जरूरत को ध्यान में रखें। अपनी खेती का जिक्र करते हुए कहा कि दिसंबर में खरबूजा लगाते हैं जो अप्रैल के प्रथम सप्ताह में बाजार में बिकता है। उस वक्त खूब मांग होती है। इस वक्त 18 एकड़ में बागवानी कर रहे हैं, जिसमें चार एकड़ में अमरूद, चार एकड़ में किन्नू, चार एकड़ में नींबू, एक एकड़ में मौसमी, बेर, खजूर आदि की खेती कर रहे हैं। तीन एकड़ में पॉली हाउस बनाया है, जिसमें शिमला मिर्च लगी है।
हजारों लीटर पानी बचाया
अपनी खेती में कम से कम रासायनों का प्रयोग कर रहे परविंद्र पानी की भी खूब बचत करते हैं। इन्होंने ड्रिप सिस्टम से सिंचाई के लिए खेत में टैंक बनवाया है। इसमें नहरी पानी को एकत्रित कर लेते हैं और उससे ही सिंचाई करते हैं। इससे खेत में एक बूंद भी पानी व्यर्थ नहीं जाता है। साथ ही फसलों की गुणवत्ता भी अच्छी रहती है।

हिसार। पॉली हाऊस में तैयार सब्जियों के पौधे।- फोटो : Hisar

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