आइए संकल्प लें... दुनिया से जाने के बाद भी किसी के शरीर में रहेंगे जिंदा
अंगदान दिवस पर विशेष : मानव शरीर के काफी अंग ऐसे जो कृत्रिम तौर पर नहीं हो सकते तैयार
संवाद न्यूज एजेंसी
हिसार। कौन जाने अगले पल क्या हो, क्यों न कुछ ऐसा कर जाएं कि दुनिया से विदा होने के बाद भी हम किसी और के शरीर में जिंदा रह सकें। हमारे बाद हमारी आंखों से कोई दूसरा दुनिया को देख सके या हमारा दिल किसी और की धड़कन बन सके। अंगदान कर हम मरने के बाद भी किसी की मुस्कान बन सकते हैं। आज 27 नवंबर को राष्ट्रीय अंगदान दिवस पर हम संकल्प लें कि दुनिया से जाने के लिए हमारे अंग किसी जरूरतमंद का जीवन संवारेंगे।
मेरे पति की आंखों आज भी देख रही जहां
विश्वास सीनियर सेकेंडरी स्कूल से रिटायर्ड प्राचार्या शैल बाला जैन ने बताया कि उनके पति कैलाश चंद जैन ने अपना शरीर दान किया था। उनकी दोनों आंखें आज भी इस खूबसूरत जहां को देख रही हैं। यह मार्च 2017 की बात है। उनकी मौत के बाद उनके शरीर को डोनेट किया गया था। शैल बाला जैन ने बताया कि उन्होंने भी अपना शरीर दान करने के लिए आवेदन किया है। शरीर दान करने का यह जिले का पहला ही मामला था। उनकी बेटी, दामाद ने भी पूरे शरीर को डोनेट करने के लिए अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में आवेदन किया हुआ है।
डॉ. दीनदयाल शर्मा ने रिसर्च के लिए किया था शरीर
प्रेम नगर निवासी डॉ. संजय शर्मा ने बताया कि उनके पिता डॉ. दीनदयाल शर्मा ने अपना पूरा शरीर डोनेट किया था। यह बात छह महीने पहले की है। मेडिकल स्टूडेंट्स की रिसर्च के लिए उन्होंने शरीर को डोनेट किया था। संजय शर्मा ने बताया कि सभी को ऐसा करना चाहिए ताकि किसी को नया जीवनदान मिल सके। उन्होंने अंगदान दिवस पर कहा कि हमारा तो शरीर मौत के बाद जलाने पर खत्म हो जाता हैं। शरीर के अंग दान करना और आंखें दान करना महादान है। आंखों से बड़ा दान कोई नहीं है क्योंकि आंखें इस खूबसूरत दुनिया को देखने का मौका देती है।
मानव शरीर के काफी ऐसे अंग हैं जिन्हें कृत्रिम तौर पर तैयार नहीं किया जा सकता। लाखों लोग आंखों का इंतजार कर रहे हैं। नेत्रदान कर हम किसी की जिंदगी को रोशन कर सकते हैं। हर एक व्यक्ति को अंगदान के लिए आगे आना चाहिए। हमारे शरीर के कुछ अंग दूसरों के जीवन को सफल बना सकते हैं। - डॉ. रमेश पूनिया, बायोलॉजिस्ट, नागरिक अस्पताल