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हिंदी माध्यम में पढ़ाई कर अंतरिक्ष तक पहुंचीं कल्पना चावला

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हिसार। ब्रिटिश हुकूमत के दौरान लार्ड मैकाले ने देश में अंग्रेजी की जड़ें इतनी गहरी कर दी थी कि आज भी हम अंग्रेजी की गुलामी से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। हिंदी की किताबें बिकना बंद हो गई हैं, क्योंकि हमारी नई पीढ़ी अंग्रेजी में पढ़ाई कर रही है। अब बच्चे चाचा चौधरी की जगह हैरी पोटर पढ़ रहे हैं। हमें यह बदलना ही होगा। यह कहना है वरिष्ठ साहित्यकार कमलेश भारतीय का। वह मंगलवार को हिंदी दिवस के अवसर पर राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में अमर उजाला की ‘हिंदी हैं हम’ मुहिम के तहत आयोजित संगोष्ठी को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे।
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हिंदी जानतें हैं तो रोजगार की कमी नहीं
साहित्यकार कमलेश भारतीय ने कहा कि अंतरिक्ष में पहुंचने वाले राकेश शर्मा और कल्पना चावला ने विद्यालय में हिंदी माध्यम में ही पढ़ाई की थी। समय के साथ लोगों को हिंदी के प्रति गुमराह किया गया। कहा जाता रहा कि हिंदी से रोजगार नहीं मिलेंगे, लेकिन, अगर हम अच्छी हिंदी जानते हैं तो भी रोजगार के अवसरों की कमी नहीं। उन्होंने कहा कि केवल हिंदी भाषा के कारण ही मैं आज तक एक भी दिन बेरोजगार नहीं रहा।
हमें गर्व करना चाहिए कि हम हिंदीभाषी
प्राचार्या डॉ. कुसुम सैनी ने कहा कि हिंदी को हाशिए पर ले जाने में हिंदी भाषी लोगों का ही योगदान है। हम अपने बच्चों को अंग्रेजी में पढ़ाई करवाकर खुश होते हैं, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। हमें गर्व करना चाहिए कि हम हिंदीभाषी हैं और हमारी भाषा संसार में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। कार्यक्रम के दौरान हिंदी दिवस पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता के विजेता बीए तृतीय के सुनील, बीए द्वितीय की किरण राणोलिया और निशा व अंकिता को सम्मानित किया गया।
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इस मौके पर हिंदी विभाग की अध्यक्षा डॉ. दीपमाला, हिंदी साहित्य परिषद की सचिव डॉ. कमलेश दूहन, डॉ. राजपाल सिंह, डॉ. रूबी, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, जीतबाला, शमशेर सिंह, सुषमा व डॉ. रमेश आर्य मौजूद रहे। कार्यक्रम में बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा अनन्या और विद्यार्थी संजय ने हिंदी कविताएं सुनाकर दर्शकों को भाव विभोर कर दिया। अंत में मुख्य वक्ता को डॉ. राजपाल द्वारा लिखित डॉ. संतराम बीए की पुस्तक भेंट की गई।
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