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असुरक्षित बचपन : सीसीटीवी न सेफ्टी किट, स्कूल वाहन अनफिट

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स्कूल बस का ड्राइवर बिना सीट बेल्ट बैठा हुआ। - फोटो : Hisar
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हिसार। नया सत्र शुरू होने के साथ ही सड़कों पर एक बार स्कूली वाहनों की धमाचौकड़ी शुरू हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को ताक पर रखकर निजी स्कूलों के वाहन बेखौफ फर्राटे भर रहे हैं। गांव से लेकर शहर की सड़कों पर दौड़ने वाले निजी स्कूलों के अधिकतर वाहन सुरक्षित स्कूल वाहन नीति के नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। मासूम बच्चों की सुरक्षा के साथ रोजाना खिलवाड़ हो रहा है।
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जिले के करीब 450 निजी स्कूलों में 1350 से अधिक स्कूली वाहन बच्चों को लाने और ले जाने में लगे हैं। इन निजी स्कूलों के अधिकतर वाहनों में न सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, न ही सेफ्टी के फर्स्ट एड बॉक्स किट रखी है। कई वाहनों के चालक बिना वर्दी पहने व बिना सीट बेल्ट लगाए वाहन चलाते हैं। हां अगर सड़क पर कहीं पुलिस नजर आए तो चालक सीट बेल्ट जरूरी लगा लेते हैं। वहीं मानकों से परे एक खिड़की वाली स्कूल बसें भी दौड़ाई जा रही हैं। गाइडलाइन के तहत स्कूली वाहन में सीसीटीवी कैमरे, जीपीएस सिस्टम, मेडिकल किट व दो दरवाजे होने अनिवार्य किया गया है। शहर में कई निजी स्कूलों की ओर से खटारा वाहन बच्चों को लेकर जा रहे हैं, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। इस मामले को यातायात विभाग को गंभीरता से लेने की जरूरत है।
सुरक्षा के लिए जरूरी मानक
- वाहनों में अग्निशमन यंत्र होने जरूरी।
- फर्स्ट एड बाक्स होना जरूरी है।
- वाहनों की खिड़कियों में ग्रिल लगा होना चाहिए।
- वाहनों पर बड़े अक्षरों मे रिफ्लेक्टर सहित स्कूल बस या वैन लिखा होना चाहिए।
- बसों का रंग पीला होना चाहिए।
- सीसीटीवी कैमरे लगे होने चाहिए।
- इमरजेंसी डोर का लगा होना चाहिए।
- बच्चों को उतारने-चढ़ाने के लिए महिला सहायक होनी चाहिए।
- स्कूल वाहन में मानिंटरिंग के लिए एक शिक्षक होना चाहिए।
-स्कूल का नाम व नंबर बस के पीछे लिखा होना चाहिए।
- वाहन चालक को 5 साल का न्यूनतम अनुभव होना चाहिए।
- वाहन चालक को वर्दी में होना चाहिए
- स्कूल वाहन चालक के पैर में जूते और सीट बेल्ट लगाई होनी चाहिए।
- स्कूल वाहन का फिटनेस सर्टिफिकेट होना चाहिए।
सुरक्षा की दृष्टि से सभी को सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी के नियमों की पालना करना जरूरी है। इसके लिए जिला शिक्षा विभाग से हमारी समय-समय पर बैठक होती रहती है। यातायात के नियमों को तोड़ने वाले वाहनों के चालान भी काटे जाते हैं। अधिकतर निजी स्कूल वाहनों के पास परमिट है। स्कूल वाहन चालकों के लिए लगातार निर्देश जारी किए जो हैं। स्कूलों में भी जाकर उनको जागरूक करते हैं। - डॉ. सुनील कुमार, आरटीए, हिसार
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मंगलवार को हमने निजी स्कूल वाहनों की चेकिंग की। ज्यादातर वाहनों में अग्निशमन यंत्र नहीं थे। कुछ बसों में सीसीटीवी कैमरे नहीं मिले। कुछ में फर्स्ट एड बॉक्स नहीं थे। फिलहाल चालकों को चेतावनी देकर सभी मानक पूरे करने के निर्देश दिए हैं। - धर्मबीर सिंह, एसआई, ट्रैफिक पुलिस हिसार
सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी का पालन करना चाहिए। पॉलिसी का पालन न करने वाले वाहनों पर कार्रवाई होनी चाहिए। बच्चों को सुरक्षात्मक उनके घर तक पहुंचाना स्कूल प्रशासन की ड्यूटी है। - कुलदीप सिहाग, जिला शिक्षा अधिकारी हिसार

स्कूल बस में बच्चे कह रहे हैं यहां पर होता है फर्स्ट एड बॉक्स, लेकिन बस में कोई सुविधा नहीं। संवाद - फोटो : Hisar

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