मुख्यमंत्री उड़नदस्ते की टीम सुबह नगर परिषद कार्यालय में पहुंची। एएसआई राकेश के नेतृत्व में टीम जांच करने पहुंची। छापा की कार्रवाई के लिए बिजली निगम सब अर्बन कार्यालय के एसडीओ मोहन लाल को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया था। मुख्यमंत्री उड़नदस्ते की टीम को सूचना मिली थी की सफाई के कार्य में अनियमितता बरती जा रहीं हैं व सफाई के लिए मिलने वाले बजट का दुरुपयोग किया जा रहा है। कागजों में बताई जाने वाली बातों व वास्तविकता में काफी फर्क है। इसको लेकर टीम ने परिषद की सफाई ब्रांच में जांच की। टीम के अनुसार एक से सात दिसंबर तक सफाई पखवाड़ा चलाया गया था। इस दौरान काफी मात्रा में कचरा निकला, लेकिन कचरा नए डंपिंग स्टेशन में नहीं डाला गया। वास्तविकता देखने के लिए बीड फार्म में बने नए डंपिंग स्टेशन की जांच की। दावा था कि बीते एक सप्ताह से यहां पर कचरा डाला जा रहा है। वहां पर टीम को करीब 15 टन कचरा मिला। टीम ने इसको लेकर परिषद के अधिकारियों से सवाल भी पूछा। टीम को बताया गया कि शहर से प्रतिदिन 38 टन कचरा निकला है। इस हिसाब से वहां पर करीब 250 टन कचरा होना था। टीम के अनुसार सरकार के सफाई बजट का दुरुपयोग किया जा रहा है।
परिषद की ओर से 20 लाख रुपये महीना सफाई का ठेका दिया हुआ है। कचरा कलेक्शन के लिए 27 टिप्पर भी हैं, लेकिन इसके बावजूद भी शहर से कचरे का उठान नहीं हो रहा।
वीडियो कॉल कर जांची उपस्थिति
परिषद में छापे के दौरान एसओ सुखदेव सिंह, जेई सचिन शर्मा सहित अन्य कर्मचारी गैरहाजिर थे। एसओ ने टीम को सूचना दी की वह एसडीएम कार्यालय में गए हुए हैं। वहीं अतिरिक्त चार्ज के चलते जेई सचिन शर्मा नारनौंद व प्रधानमंत्री आवास योजना के पंकज उकलाना में उपस्थित मिले। इसके लिए टीम ने उनके साथ वीडियो कॉल की। वीडियो कॉल में उन्होंने वहां के कार्यालय को दिखाया। जिसके बाद उनकी हाजिरी दुरुस्त की गई। कुल 9 कर्मचारी अनुपस्थित मिले। इसमें प्रधानमंत्री आवास योजना के तीन, नियमित कर्मचारियों में से एक क्लर्क व दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, हरियाणा कौशल रोजगार निगम के तहत एक, दो सफाई कर्मचारी अनुपस्थित मिले।