हिसार। होमगार्ड भर्ती घोटाला के मामले में सोमवार को अग्रोहा निवासी सुनील कुमार व लांधड़ी निवासी विनोद कुमार ने हिसार सिविल कोर्ट में केस दायर किया था। इस मामले में मंगलवार को सिविल जज (जूनियर डिविजन) अंतरप्रीत की अदालत में सुनवाई हुई। अदालत ने डीजी होमगार्ड, जिला कमांडेंट हिसार, सेंट्रल कमांडेंट हिसार व कलेक्टर (हरियाणा सरकार) को समन जारी करने के आदेश दिए हैं। उक्त सभी को 30 सितंबर को अदालत में पेश होने होगा।
एक और स्वयंसेवक आया सामने
वहीं मामले की जैसे-जैसे परतें खुलती जा रही हैं, वैसे-वैसे कई पीड़ित स्वयंसेवक आगे आ रहे हैं। मंगलवार को नारनौंद के गांव पुट्ठी निवासी स्वयंसेवक जसबीर ने बताया कि वर्ष 2012 से 2015 तक वह हांसी में स्वयंसेवक रहा। वर्ष 2015 को कंपनी कमांडर विष्णु ने उसे बिना किसी सूचना के अचानक नौकरी से हटा कर अन्य को उसके स्थान पर नियुक्त कर दिया। इस संबंध में उसने गृह रक्षी विभाग के हिसार कार्यालय में अधिकारियों से उसे नौकरी पर वापस नियुक्त करने की गुहार लगाई थी, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। मंगलवार को वह अधिवक्ता योगेश सिहाग के पास पहुंचा। अब जसबीर भी सिविल कोर्ट में केस दायर करेगा। अधिवक्ता योगेश सिहाग ने बताया कि मामले के संबंध में उनके पास कई स्वयंसेवक आ चुके हैं। वह भी जल्द केस दायर करने का विचार बना रहे हैं।
होटल बुक करवाकर चला गया था घर
कंपनी कमांडर सुखबीर पानू ने मंगलवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी की। उन्होंने कहा कि उन पर लगे आरोप निराधार हैं। 6 अगस्त को उन्होंने और प्लाटून कमांडर जयभगवान ने तत्कालीन जिला आदेशक विनोद कुमार के लिए होटल बुक करवाया था, लेकिन उसके बाद वह घर चले गए थे। इससे पहले भी एक स्वयंसेवक की तरफ से दी झूठी शिकायत पर उन्हें पद से हटाकर जिला मुख्यालय में लगा दिया गया था।
वर्ष 2019 में भी हुई थी फर्जी भर्ती
कंपनी कमांडर सुखबीर पानू ने बताया कि वर्ष 2019 को भी जिले में 78 स्वयंसेवकों की फर्जी भर्ती की गई थी। उस दौरान असिस्टेंट कमांडर बजरंग लाल व प्लाटून कमांडर रमेश कुमार को नोटिस भी जारी हुआ था। बावजूद उसके डीएसपी ने इन दोनों को स्वयंसेवकों को इनरोल करने की कमेटी का सदस्य नियुक्त किया। हालांकि प्लाटून कमांडर रमेश कुमार को चार्ज देने बारे राज्य मुख्यालय की ओर से स्पष्टीकरण भी मांगा गया था।
करोड़ों रुपये का है मामला
कंपनी कमांडर सुखबीर पानू ने कहा कि बजरंग लाल जेल विभाग से इस विभाग में वर्ष 2015 से कार्यरत है। उसके दो बार वापसी के आदेश हुए, लेकिन दोनों बार आदेश रद हो गए। आरोप है कि बजरंग की ओर से वर्ष 2019 की तर्ज पर इस बार भी फर्जी भर्ती को लेकर उन्होंने हस्ताक्षर करने से मना किया और इस संबंध में जिला मुख्यालय में भी लिखित में दिया था। आरोप है कि जिन नए स्वयंसेवकों को भर्ती किया जाना था उनका रिकॉर्ड देखा तो पता चला कि वह पहले स्वयंसेवक नहीं रहे।
मिल रहीं धमकियां : पानू
कंपनी कमांडर सुखबीर पानू ने कहा कि ये फर्जी भर्ती घोटाला करोड़ों रुपये का है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें अब इस मामले को लेकर धमकियां भी मिल रही हैं। उनका कहना है कि उनके साथ या उनके परिवार के साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो इसके जिम्मेदार फर्जी भर्ती मामले में जुड़े सभी लोग होंगे।