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Haryana Weather Update: सिरसा में 18 एमएम बारिश, प्रदेश में 9 तक बारिश की संभावना

Thu, 06 Jan 2022 12:57 AM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, हिसार (हरियाणा)

सार

बारिश से सरसों और गेहूं की फसलों को संजीवनी मिली है। बुधवार को हिसार में 13.2 एमएम बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग के अनुसार 8 जनवरी को तेज बारिश का यलो अलर्ट जारी किया गया है। 9 जनवरी तक बारिश की संभावनाएं बनी रहेंगी।
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हिसार में बारिश के दौरान ठंड से बचने के लिए अलाव जलाकर बैठे युवक। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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पश्चिमी विक्षोभ, अरब सागर से आने वाले नमी वाली हवाओं व राजस्थान के ऊपर बने साइक्लोनिक सर्कुलेशन के असर से बुधवार को हरियाणा के ज्यादातर जिलों में हल्की से मध्यम से बारिश हुई। सिरसा में 18 एमएम बारिश दर्ज की गई। हिसार में 13.2 एमएम बारिश दर्ज की गई, जिससे अधिकतम तापमान 5.3 डिग्री गिरकर 15.2 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। गुरुग्राम केवीके में अधिकतम तापमान में सामान्य से 8.6 डिग्री तक की गिरावट दर्ज की गई और यह 14.7 डिग्री सेल्सियस रहा। इस बारिश से रबी फसलों को संजीवनी मिली है और प्रदेश के किसानों का सिंचाई पर आने वाला खर्च बच गया है।   

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हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मौसम विभाग के अनुसार 9 जनवरी तक बादलवाई और बीच-बीच में गरज चमक व हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। इस दौरान दिन के तापमान में गिरावट व रात के तापमान में बढ़ोतरी दर्ज होने की संभावना है।

प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में बुधवार सुबह मौसम में करवट ली। इसके साथ ही हल्की बारिश शुरू हो गई। इसके बाद शाम तक रुक-रुक कर बारिश होती रही। इसके अलावा तेज गति से हवाएं भी चलीं, जिसने लोगों को ठिठुरने पर मजबूर कर दिया। बारिश के असर से दिन के तापमान में भी काफी गिरावट आई।
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जिलों में हुई बारिश - (एमएम में)

  • सिरसा            18.0
  • हिसार             13.2
  • चरखी दादरी     10.0
  • भिवानी             7.0
  • फतेहाबाद          7.0

 

रबी फसलों के लिए बेहद फायदेमंद है यह बारिश

एचएयू के कृषि मौसम विभाग के अध्यक्ष डा. मदन लाल खिचड़ के अनुसार यह बारिश सरसों, गेहूं समेत अन्य रबी फसलों के काफी फायदेमंद साबित होगी। इस बारिश से पाले व बीमारियों से बचाव हो गया। वर्तमान में फसलों की सिंचाई की आवश्यकता थी, जो पूरी हो गई। इससे किसान का सिंचाई पर आने वाला खर्च भी बच गया। इस बारिश से फसलों में बढ़ोतरी होगी, जिससे उत्पादन भी बढ़ेगा। 

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