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पिता-कोच बने रोल मॉडल तो खेल मैदान में छोड़ी अमिट छाप

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हिसार। युवाओं को सही दिशा और प्रेरणा की जरूरत होती है। यदि उन्हें सही मार्गदर्शन मिले तो वह किसी भी क्षेत्र में ऊंचाइयां छूं सकते हैं। बुधवार को स्वामी विवेकानंद की जयंती को युवा दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। इसको लेकर युवा खिलाड़ियों से बातचीत की तो उन्होंने कहा कि उनके लिए पिता और कोच ही रोल मॉडल है। उन्हीं के प्रयास और सहयोग से वह खेल मैदान में उतरे और अपनी अमिट छाप छोड़ी। आज वह पदक जीतकर न केवल देश का नाम रोशन कर रहे हैं, बल्कि दूसरे युवाओं को भी प्रेरित कर रहे हैं।
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नशे से दूर रहें, दूसरों को करें प्रेरित
पिता शमशेर सिंह और कोच अनूप कस्वां मेरे लिए रोल मॉडल हैं। दोनों ने मुझे न केवल मोटिवेट किया, बल्कि मदद भी की। आज मैं उन्हीं की वजह से इस मुकाम पर पहुंच पाया हूं। मैं युवाओं को संदेश देना चाहूंगा कि वह नशे से दूर रहें और दूसरों को भी प्रेरित करें। - शुभम, इंटरनेशनल मेडलिस्ट, हैंडबाल
खेलों में बनाएं करिअर
आज युवा नशे की गिरफ्त में आकर अपना भविष्य खराब कर रहा है। नशे से दूर रहकर ही हम शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रह सकते हैं। साथ ही खेलों में अपना करिअर बना सकते हैं। मैं कहना चाहूंगा कि वे अपने आसपास रहने वाले युवाओं व बच्चों को नशे से बचने के लिए प्रेरित करें। मुझे मेरे कोच ने खेलने के लिए प्रेरित किया। - विपुल नहरा, नेशनल मेडलिस्ट, हैंडबाल
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युवा करें अपना लक्ष्य निर्धारित
युवाओं को अपना लक्ष्य निर्धारित कर उस पर फोकस करना चाहिए। तभी हम कामयाबी हासिल कर सकते हैं। मैंने स्कूल समय से ही खेल करिअर की शुरुआत की। इसके बाद स्टेडियम आना शुरू कर दिया और कोच ने खेलने के लिए प्रेरित किया। आज मैं इंटरनेशनल स्तर पर खेलकर देश का नाम रोशन कर रही हूं। - सोनिया, इंटरनेशनल मेडलिस्ट, हैंडबाल
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