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ऐलनाबाद उपचुनाव : 70 फीसदी साइलेंट मतदाताओं ने बढ़ाईं प्रत्याशियों की धड़कनें

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गांव माधो सिंघाना में हुक्के गुड़गुड़ाते राजनीति पर चर्चा करते ग्रामीण। - फोटो : Hisar
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सुरेंद्र दलाल
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ऐलनाबाद (सिरसा)। ऐलनाबाद विधानसभा सीट के उपचुनाव को लेकर किसान तबके को छोड़कर अन्य वर्गों के मतदाताओं में चुप्पी है। यह 60 से 70 प्रतिशत साइलेंट वोटर ही हार-जीत तय करेंगे। वोट किसे और किस मुद्दे पर डालेंगे के सवाल पर कुछ लोग हिचकिचाते हुए देखेेंगे जी कहकर पल्ला छुड़ा लेते हैं। ऐलनाबाद में बाहरी क्षेत्रों से आए 5 हजार से अधिक लोग सुबह से शाम तक अपने प्रत्याशी के लिए माहौल बनाने का प्रयास कर रहे हैं। जनसभा में कुछ मिनट पहले तक 80 प्रतिशत तक खाली नजर आने वाली कुर्सियां काफिले से आई भीड़ से पूरी तरह से भर जाती हैं। भाजपा-नेताओं के विरोध का स्वर अब उतना आक्रामक नहीं रह गया।
ऐलनाबाद उपचुनाव में वोटिंग के लिए आखिरी तीन दिन बचे हैं। सीएम मनोहरलाल, डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला की इंट्री के बाद प्रचार तेज हो गया है। भारी सुरक्षा के बीच ही सही लेकिन सीएम-डिप्टी सीएम ने ऐलनाबाद में सभाएं की हैं। वीरवार-शुक्रवार को प्रचार अपने चरम पर होगा। शुक्रवार को माइक्रो मैनेजमेंट पर काम होगा। तीनों प्रमुख प्रत्याशियों के साथ भारी भरकम अमला चल रहा है। इनकी जनसभा में भी भीड़ ठीक दिखती है। प्रत्याशियों के साथ उनकी आईटी सेल भीड़ अधिक से अधिक दिखाने वाले एंगल से फोटो करती है। भीड़ में हर दूसरे हाथ में मोबाइल का कैमरा चालू होता है। प्रत्याशियों ने कैमरामैन के साथ साथ यू ट्यूबर भी तैनात किए हैं। भाजपा-जजपा के कार्यक्रमों में भारी संख्या में पुलिस तथा फोर्स की तैनाती की जाती है। सादी वर्दी में भी सैकड़ों पुलिस कर्मी घूमते रहते हैं। खुफिया विभाग के कर्मियों को गांव स्तर पर तैनात किया गया है, जो अपने रिश्तेदारों के यहां ठहरे हुए हैं। जनसभाओं में महिलाओं की भागीदारी नगण्य है। 30 से 40 प्रतिशत वोटर ही खुलकर बोल रहे हैं। 60 से 70 प्रतिशत वोटर साइलेंट हैं। ये साइलेंट वोटर ही हार-जीत तय करेंगे।
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ऐलनाबाद अनाज मंडी में चाय की दुकान चलाने वाले दीपक पंजाबी ने कहा कि एथों ते तगड़ा कंडिडेट ही जितना सी। दीपक मूल रूप से बिहार के हैं। तीन दशक पहले उनके पिता यहां मंडी में मजदूरी के लिए आए तो वह साथ आए थे। अब वह स्थानीय बोली और राजनीति दोनों को समझने लगेे हैं। उन्होंने कहा कि यहां धन और बल वाला ही जीतेगा। दिन भर चाय की दुकान पर सभी दलों के समर्थक आते हैं। जिसमें अधिकतर दूसरे जिलों से आए हैं। दीपक ने कहा कि यहां लोगों के पास अच्छी खेती है। नशे के अलावा यहां कोई बड़ी समस्या नहीं है। वोट किस आधार पर दोगे के सवाल पर दीपक ने कहा साहब हम गरीब आदमी हैं। जहां की हवा होगी उसी ओर डाल देंगे।
घोड़ी चलाकर अपना परिवार चलाने वाले राजेश जांगड़ा ने कहा कि मंडी से सामान लेकर गांवों तक पहुंचाते हैं। राजेश ने कहा कि यहां चुनाव में किसान खुलकर बोल रहे हैं। किसानों के अलावा यहां कोई खास मुद्दा नहीं है। हर बार यहां मुद्दा इलाके की चौधर का रहता है। महंगाई कितना बड़ा मुद्दा बनेगी सवाल पर उन्होंने कहा ऐलनाबाद में इसका असर नहीं होगा। जातिगत समीकरण चुनाव में हार जीत तय करेंगे। उन्होंने कहा कि यहां पार्टी नहीं व्यक्ति का चेहरा ही लड़ता है। पार्टी की बजाय व्यक्तिगत छवि और व्यवहार के आधार पर वोट मिलेंगे। ऐलनाबाद शहर की समस्याओं के सवाल पर उन्होंने कहा कि यहां बारिश के दिनों में जलभराव की समस्या है। इसके अलावा कोई बड़ी परेशानी नहीं है।
माधो सिंघाना गांव में हुक्का गुड़गुड़ाते ग्रामीण खुलकर अपनी भावनाओं को जाहिर करते हैं। रंजीत सिंह, महेंद्र सिंघाना, नरेंद्र सिंह, मनमीत बैनीवाल ने कहा कि किसानों के मुुद्दे को लेकर वोटिंग करेंगे। उप चुनाव में दूसरा कोई मुद्दा नहीं है। जिस प्रत्याशी को जिताने का फैसला लिया है, उसके साथ खड़े रहेंगे। महिला शिक्षा, रोजगार, अपराध, विकास को लेकर किसी तरह की बात नहीं हो रही। यहां किसानों के लिए उपचुुनाव मूछों का सवाल है। इस एरिया में दबंग नेता को ही प्राथमिकता दी जाती है, जो पैसा भी खूब खर्च कर सके।
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यह बनेंगे वोटिंग के आधार...
ऐलनाबाद उपचुनाव में चार प्रमुख मुद्दों पर वोटिंग होगी, जिनमें पहला किसान आंदोलन है। किसानों का वोट एकतरफा जाना तय है। अब खेतिहर मजदूर किसान के साथ कितना जाएगा यह देखना होगा। दूसरा मुद्दा यहां जातिगत आधार होगा। प्रत्याशी की जाति के आधार पर भी मतदान होगा। तीसरा आधार व्यक्तिगत संबंधों का होगा। पिछले तीन चार दशकों का जुड़ाव भी वोटिंग फैक्टर रहेगा। चौथा आधार नेताओं से व्यक्तिगत काम का होगा। मतदाता यहां सार्वजनिक विकास की बजाय अपने खुद के काम चाहते हैं। जिसमें थाने से लेकर एसपी तक को फोन कराने के काम भी शामिल हैं।
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