सिरसा जिले में ऐलनाबाद विधानसभा उपचुनाव के लिए मतदाता पहले से ही अपना मन तय कर चुके हैं। अपने तय एजेंडे के अनुसार ही वोट डालेंगे। गांव में मतदाता दिनभर पार्टियों का प्रचार सुनते रहते हैं। अपने प्रतिद्वंद्वी नेता की सभा में भी शामिल होते हैं। उनके भाषण सुनकर अपने नेताओं को फीडबैक दे रहे हैं। इस चुनाव में सरपंची के चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की अहम भूमिका रहेगी। सरपंचों के पास अपना व्यक्तिगत वोट बैंक है। अब वह अपना वोट बैंक किस तरह से और कितना ट्रांसफर करा सकेंगे, यह समय बताएगा।
ये भी पढ़ें-
ऐलनाबाद उपचुनाव: दुष्यंत चौटाला बोले– चाचा जुबान के धनी नहीं, बयान के धनी हैं, सीएम ने भी साधा अभय पर निशाना
पार्टी नहीं, उम्मीदवार देख करेंगे मतदान
ऐलनाबाद कस्बा, नाथूसरी चौपटा, माधो सिंघाना, जमाल, पोहड़का, चाहरवाला गांव से ही विधायक तय होगा। इन गांवों से ही चंडीगढ़ की राह निकलेगी। गांव जमाल में नीम के पेड़ के नीचे बैठ लोग राजनीति पर चर्चा कर रहे हैं। तीनों प्रमुख प्रत्याशियों को लेकर एक-दूसरे से बहस भी करते हैं। इन लोगों ने अपने-अपने तर्क देकर अपने प्रत्याशियों के जीत के दावे किए। गांव के लोगों ने बताया कि पार्टियों को लेकर नहीं, उम्मीदवार को लेकर वोट देंगे। गांव की पक्की सड़कें, बिजली के खंभे, शानदार चौपाल हैं। विकास के नाम पर यहां वोट नहीं डाले जाएंगे। इस गांव में जातिगत समीकरण बड़े अहम हैं।
काम करने वाले को ही देंगे प्राथमिकता
गांव माधो सिंघाना में जीत सिंह अपने बेटे सुभाष और बहू सुमन के साथ खेत में कपास की चुगाई कर रहे हैं। अनुसूचित वर्ग से संबंध रखने वाले जीत सिंह ने बताया कि गांव में नहर आने के बाद आर्थिक तरक्की हुई थी। जिस कारण हम काम कराने वाले को ही प्राथमिकता देंगे। उन्होंने बताया कि गांव में किसान आंदोलन का कुछ हद तक असर है।
ये भी पढ़ें-
उपलब्धि: देश में पहली बार फसलों पर ड्रोन से होगा खाद का स्प्रे, हरियाणा के करनाल से होगी शुरुआत
किसी को जिताने नहीं, हराने के लिए होगी वोटिंग
ऐलनाबाद कस्बे के निवासी अजय डूडी ने बताया कि दो प्रत्याशियों की आमने-सामने की टक्कर है। लोगों का पार्टी विशेष को लेकर गुस्सा है। किसी को जिताने के बजाय यहां के लोग किसी को हराने के लिए वोटिंग करने जाएंगे। उन्होंने कहा कि अब लोगों को प्रभावित नहीं किया जा सकता। लोग अपना मन तय कर चुके हैं। ऐलनाबाद के निवासी रवि शर्मा ने बताया कि नौकरियां मिलना भी चुनाव में आधार बनेगा। उन्होंने कहा कि इस विधानसभा के अधिकतर बड़े गांवों में सरपंचों का काफी प्रभाव है।
ये भी पढ़ें-
बहादुरगढ़ में बड़ा हादसा: किसान आंदोलन में शामिल पंजाब की तीन महिला प्रदर्शनकारियों को डंपर ने कुचला, मौत
...तो कुछ और होते नतीजे
अगर यह उपचुनाव सरपंची के चुनाव के बाद होते, तो इसका रिजल्ट अलग होता। सरपंचों को अपने पक्ष में करने के लिए रणनीति बनाई जा रही है। प्रत्याशियों की ओर से सरपंचों को लालच दिए जा रहे हैं। जीत सिंह, रवि डूडी, पवन बेनीवाल ने बताया कि पैंतालिसा गांवों के लोग ही विधायक तय करेंगे। इन गांवों में चौधर एक मुद्दा है। मतदाता प्रत्याशियों को लुभाने के लिए अब तो गांव-गांव आ रहे हैं। मतदान के बाद यह लोग गांव में झांकने तक नहीं आते।
अब दफ्तरों में बन रहे जातिगत समीकरण
चुनाव प्रचार थमने के बाद अब राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता अपने दफ्तरों में बैठकर समीकरण तय करने में जुट गए हैं। जातिगत वोट की लिस्ट लेकर तीनों प्रमुख प्रत्याशियों के वोट के आंकड़ों का आकलन तय कर रहे हैं। किस जाति का वोट किस पार्टी या प्रत्याशी के साथ जाएगा, इसको लेकर तर्क दे रहे हैं।
ये भी पढ़ें-
डीएपी की किल्लत: कृषि मंत्री बोले- प्रदेश के लोग राजस्थान के अपने रिश्तेदारों को दे रहे खाद, हरियाणा में संकट नहीं
सेम की समस्या और सिंचाई के पानी की कमी
ऐलनाबाद क्षेत्र के कुछ गांवों में सेम की समस्या है। यहां भूमिगत जल स्तर ऊपर होने के कारण किसान खेती नहीं कर पाते। इसमें 16 गांव सीधे तौर पर प्रभावित हैं। इसी विधानसभा के कुछ गांवों में नहरी पानी की कमी भी है। जमाल गांव में नहर का काम पिछले कई समय से अटका है।