हरियाणा के हिसार शहर की एक अदालत में फर्जी कागजात जमा करवाकर हेरोइन तस्करी के आरोपी नाइजीरियन को जमानत दिलवाने के मामले में पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने इस मामले में कैथल के फर्श माजरा के रहने वाले हरिराम को गिरफ्तार किया है।
पुलिस की पूछताछ में सामने आया है कि हरिराम और उसके साथियों ने बरवाला के जयभगवान, पालाराम व राजकुमार के नाम से फर्जी कागजात तैयार कर एक करोड़ रुपये की हेरोइन तस्करी मामले में गिरफ्तार नाइजीरियन फ्रैंक जोसेफ को जमानत दिलवाई थी।
वह फर्जी तरीके से आरोपियों की जमानत करवाने वाले एक गिरोह का गुर्गा है। गिरोह के गुर्गे रुपये लेकर कई जिलों में फर्जी कागजात पेश कर कई आरोपियों की जमानत करवा चुके हैं। पुलिस आरोपी हरिराम को बुधवार को कोर्ट में पेश करेगी।
जमानत के लिए लेते हैं पांच हजार रुपये
पुलिस पूछताछ में हरिराम ने कुबूला है कि उन्होंने फर्जी कागजात तैयार करके लोगों की जमानत करवाने का धंधा चलाया हुआ है। अंबाला का वकील ललित कुमार गिरोह का मुखिया है। ललित कुमार ही ऐसे केसों का पता करवाता है जिनकी कोई जमानत नहीं करवा रहा है।
ऐसे केसों का पता चलने के बाद फर्जी कागजात तैयार करके बंदी की जमानत करवा देते हैं। जमानत की एवज में उनसे पांच हजार रुपये लेते हैं। पूछताछ में बताया कि हिसार से पहले वह अंबाला में 3, पंचकूला में 2 व आसपास के जिलों में आरोपियों की जमानत करवा चुके हैं।
पुलिस ने बताया कि हरिराम का दोस्त बलकार अंबाला में टैक्सी चलाता है और उसी के जरिये वह एडवोकेट ललित कुमार के संपर्क में आया था। हिसार पुलिस ने इस मामले में साइबर टीम की मदद लेते हुए आरोपियों के मोबाइल को ट्रेस करते हुए हरिराम को गिरफ्तार किया है। अभी तक एडवोकेट ललित कुमार और उसके पांच साथी फरार हैं।
गौरतलब है कि हिसार एसटीएफ ने 13 अप्रैल 2021 को बरवाला के पास पाबड़ा निवासी प्रदीप व खेदड़ निवासी अश्वनी व दिल्ली से नाइजीरियन फ्रैंक जोसेफ को एक करोड़ रुपये की हेरोइन तस्करी के मामले में गिरफ्तार किया था। 16 जुलाई को हिसार कोर्ट ने जोसेफ को पालाराम, राजकुमार व जयभगवान की गारंटी पर जमानत पर रिहा किया था।
जमानत के बाद जोसेफ फरार हो गया और कभी कोर्ट नहीं आया। कोर्ट ने जब उसके जमानती दस्तावेज खंगाले तो हैरान करने वाला खुलासा हुआ। जिन लोगों के कागजात जोसेफ के जमानतदाता व पहचानकर्ता के तौर पर लगाए गए थे। उन्होंने कहा कि वह कभी इस मामले में कोर्ट ही नहीं आए थे।
किसी अन्य गिरोह ने जमानतदार पाला राम, राजकुमार और पहचानकर्ता जय भगवान के फर्जी कागजात तैयार करके जोसेफ को जमानत दिलवाई थी। कोर्ट के आदेश पर सिविल लाइन थाना पुलिस ने इस मामले में फर्जीवाड़े का केस दर्ज किया गया था।