अमर उजाला कार्यालय में पुरस्कार हासिल करते छात्र जितेन
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हिसार। अखबार ने वाकई मेरी जिंदगी बदल दी है। अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति योजना के तहत मुझे 50 हजार रुपये छात्रवृत्ति मिली। इस राशि से मैंने प्रतियोगी परीक्षा की पुस्तकें खरीदीं। अब मैं एनआईटी श्रीनगर से मैकेनिकल में बीटेक कर रहा हूं। मेरे करिअर में अखबार ने विशेष भूमिका निभाई। यह कहना है अमर उजाला के बदलाव अभियान के शीर्ष विजेता गांव डोभी निवासी जितेन का। उन्हें मंगलवार को अर्बन एस्टेट-2 स्थित अमर उजाला के दफ्तर में एलेक्सा ईको-3 और ईयर बुक से नवाजा गया।
जितेन ने बताया कि उनके पिता कृष्ण कुमार गांव में ही टेलर हैं, जबकि माता शकुंतला गृहिणी हैं। जिले के गांव डोभी के राजकीय उच्च विद्यालय से दसवीं तक की पढ़ाई की। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए किसी बेहतरीन कॉलेज में दाखिले के लिए परिवार के पास रुपये नहीं थे। घर की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। इस दौरान उनके एक शिक्षक ने उन्हें अमर उजाला की अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति परीक्षा के बारे में बताया। उन्होंने 2018 में यह परीक्षा दी। परीक्षा में टॉपर रहने पर उन्हें अमर उजाला की ओर से 50000 रुपये की छात्रवृत्ति मिली। इसके बाद उसने प्रतियोगी परीक्षा की किताबें खरीदीं। उन्होंने हरियाणा सरकार की ओर से चलाई जा रही सुपर 100 परीक्षा में दाखिला लिया और आईआईटी के लिए भी तैयारी की। उनका दाखिला एनआईटी श्रीनगर में हुआ। दाखिले के समय भी छात्रवृत्ति की राशि से मदद मिली और जेईई भी क्लीयर किया। यह सब अखबार की वजह से ही संभव हो सका।
देश सेवा करना चाहता हूं
जितेन ने बताया कि वह मैकेनिकल बीटेक सेकंड ईयर में है। एमटेक के बाद देश सेवा के लिए सिविल सर्विस के क्षेत्र में जाना चाहता है। फिलहाल पूरा फोकस बीटेक पर है। जितेन ने कहा कि अखबार ने उसके जीवन में बदलाव ला दिया। अगर अखबार न होता तो शायद वह एनआईटी श्रीनगर से बीटेक करने की बजाय किसी साधारण कॉलेज में होता या कहीं छोटी मोटी प्राइवेट नौकरी कर रहा होता। बता दें कि अमर उजाला ने 15 से 30 जुलाई के बीच यह जानने के लिए बदलाव अभियान चलाया कि अखबार हमारी जिंदगी को किस तरह प्रभावित करते हैं। इस अभियान में सैकड़ों लोगों में अनुभव साझा किए। उनमें से आगरा की आकांक्षा शर्मा, गाजियाबाद की दिव्या गर्ग और हिसार के जितेन को शीर्ष विजेता घोषित किया गया था।