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Hisar: कम खाद-पानी में मिलेगी गेहूं की बंपर पैदावार, एचएयू ने विकसित की गेहूं की नई किस्म डब्ल्यूएच 1402

Sun, 14 Jan 2024 10:06 AM IST
नवीन दलाल श्याम नंदन कुमार, हिसार (हरियाणा)

सार

हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय ने किसानों के लिए कम खाद-पानी में बंपर पैदावार देने वाली गेहूं की किस्म विकसित की है। विशेषज्ञों की अखिल भारतीय कार्यशाला में भी इसे हरी झंडी मिल चुकी है। बड़ी बात यह कि यह बीज पीला रतुआ रोग प्रतिरोधी भी है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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तेजी से गिरता भूजल स्तर और बढ़ती आबादी के लिए पर्याप्त खाद्यान्न उत्पादन की चुनौतियों के बीच हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय ने कम खाद-पानी में बंपर पैदावार देने वाली गेहूं की किस्म विकसित की है। एचएयू की ओर से विकसित गेहूं की नई किस्म डब्ल्यूएच 1402 महज दो सिंचाई में ही 60 से 68 क्विंटल प्रति एकड़ तक उत्पादन देगा। पौष्टिक तत्वों की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक होने के साथ ही यह किस्म कम खाद में भरपूर पैदावार देने वाला है।

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राष्ट्रीय बीज विकास निगम से मिल चुकी हरी झंडी
विश्वविद्यालय की प्रयोगशाला में सफल होने के बाद अगस्त 2023 में महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय उदयपुर में आयोजित गेहूं एवं जौ विशेषज्ञों की अखिल भारतीय कार्यशाला में भी इसे हरी झंडी मिल चुकी है। राष्ट्रीय बीज विकास निगम से भी हरी झंडी मिल चुके इस बीज को लेकर बहुत जल्द विश्वविद्यालय प्रशासन अधिसूचना जारी करने वाला है। इसके बाद इसे भारतीय बीज वितरण निगम और हरियाणा बीज वितरण निगम के माध्यम से जल्द ही किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा।

एचएयू के गेहूं विशेषज्ञ डॉ. ओपी बिश्नोई ने बताया कि आम तौर पर सामान्य गेहूं को छह बार सिंचाई की जरूरत पड़ती है। गेहूं की नई किस्म डब्ल्यूएएच 1402 को सिर्फ दो बार सिंचाई करने की जरूरत है। पहली सिंचाई 22 और दूसरी सिंचाई 85 दिन पर करना श्रेयस्कर होगा। यह बीज हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उन क्षेत्रों के किसानों के लिए बेहतर साबित होगा, जहां पानी की उपलब्धता कम है। इसके अलावा इसमें खाद का खर्च भी कम है। ऐसे में यह बीज धरती की सेहत सुधारने और पानी बचाने वाला भी है।
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गेहूं विशेषज्ञ डॉ. बिश्नोई के मुताबिक इस गेहूं में पौष्टिक तत्व प्रोटीन की मात्रा करीब साढे बारह प्रतिशत है। आम गेहूं में इसकी मात्रा करीब 11 प्रतिशत रहती है। इसके अलावा इसमें जिंक और आयरन जैसे पोषक तत्व भी समुचित मात्रा में हैं। बड़ी बात यह कि यह बीज पीला रतुआ रोग प्रतिरोधी भी है।

जल संसाधन की कमी को देखते हुए यह जरूरी
केंद्र और राज्य सरकार कम से कम पानी का उपयोग कर अधिक से अधिक उत्पादन हासिल करने पर जोर दे रही है। जल संसाधन की कमी को देखते हुए यह जरूरी भी है। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के गेहूं विशेषज्ञ इन बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए नए- नए शोध कर रहे हैं। एचएयू में विकसित एचडब्ल्यू 1402 किस्म भी इसी तरह की सोच व शोध का परिणाम है। इस नए बीज से उत्पादन तो बढ़ेगा ही, पानी भी बचेगा। -डॉ. बीआर कम्बोज,कुलपति, हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार।

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