लेफ्टिनेंट निशांत सिवाच के साथ अभिभावक। संवाद
- फोटो : Hisar
हिसार। सेक्टर-4 पार्ट टू निवासी 22 वर्षीय अक्षय यादव और राजकीय बहुतकनीकी संस्थान कैंपस निवासी निशांत सिवाच सेना में लेफ्टिनेंट बने हैं। हिसार के दोनों बेटों ने 11 दिसंबर को हुई आर्मी की लेफ्टिनेंट पासिंग आउट परेड में हिस्सा लिया। लेफ्टिनेंट अक्षय यादव को पहली पोस्टिंग पश्चिमी बंगाल के कलिम्पा शहर और लेफ्टिनेंट निशांत सिवाच को शिलोंग में चौथी बटालियन ऑफ असम रेजिमेंट इन्फेनटरी शाखा में मिली है।
मां को सेना की जिप्सी में घुमाने का था सपना : अक्षय
सेक्टर 4 पार्ट टू निवासी राजेश यादव ने बताया कि बेटा अक्षय यादव को बचपन से ही सेना में जाने का सपना था। हम दूसरों से कार्ड मांगकर कैंट के अंदर सामान खरीदने जाते थे। तब बेटा अक्षय हमेशा मां सीता यादव से कहता था कि एक दिन मैं लेफ्टिनेंट बनकर तुम्हें सेना की जिप्सी में घुमाऊंगा। बस इसी जिद्द ने बेटे अक्षय को सेना में लेफ्टिनेंट बनाया है।
निशांत खिलौना बंदूक दिखा कहता था मां मैं एक दिन दुश्मनों को खदेडूंगा
हिसार स्थित राजकीय बहुतकनीकी संस्थान में शिक्षिका पद पर कार्यरत डॉ. मीरा सिवाच ने बताया कि जब बेटा निशांत 12 साल का था तो वह खिलौने बंदूक से खेलता था। हमेशा बंदूक दिखाकर मुझे कहना था कि मां एक दिन मैं बॉर्डर पर जाकर गन से दुश्मनों को खदेडूंगा। शिक्षिका डॉ. मीरा ने बताया कि ससुर सत्यदेव सेना में सूबेदार व जेठ रोहताश सिवाच भी नायब सूबेदार पद से सेनानिवृत्त हैं।
लेफ्टिनेंट अक्षय यादव के साथ अभिभावक। संवाद- फोटो : Hisar