हरियाणा प्रदेश की सभी मंडियों में हाल ही में मार्केटिंग फीस में बढ़ोतरी का एलान किया गया है। प्रदेश स्तर पर आढ़तियों ने सरकार को 15 दिसंबर तक मार्केट फीस में बढ़ोतरी की अधिसूचना वापस लेने की चेतावनी दी थीं। मगर मार्केट फीस को वापस नही लिया इस कारण हांसी सब्ज़ी मंडी एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल चावला के नेतृत्व में सरकार के खिलाफ़ प्रदर्शन किया गया।
प्रधान अनिल चावला ने कहा की 20 दिसंबर को पूरे प्रदेश की मंडियों में हड़ताल करने का एलान किया गया है। दरअसल, सरकार ने 2021 और 2022 में भी मार्केट फीस लेने का फैसला किया था, लेकिन तब विरोध के कारण इसे वापस ले लिया था। मार्केटिंग बोर्ड को चलाने के लिए साल में 15 करोड़ रुपये की जरूरत होने की बात कही गई थी। तब तय हुआ था कि 11,000, 21,000 और 51000 के तीन स्लैब बनाकर लाइसेंस फीस वसूली जाएगी। गांव व देहात के आढ़ती से 11000 रुपये, जिले की मंडियों में काम कर रहे आढ़ती से 21000 और शहरों में मंडियों के आढ़ती से 51000 रुपये लेने का फैसला हुआ था।
इससे सरकार को साल में 17 करोड़ रुपये का रेवेन्यू मिलना था लेकिन अब तीन लाख रुपये की फीस देने वाले आढ़तियों की फीस 50 प्रतिशत बढ़ाकर 4.50 लाख रुपए कर दी गई है। इसी तरह साल में 2 लाख रुपये की लाइसेंस फीस देने वालों की फीस बढ़ाकर 3.25 लाख रुपए कर दी गई है। सभी केटेगरी में फीस 50 प्रतिशत बढ़ाई गई है और 15 दिसंबर से इसकी वसूली करने के निर्देश दिए गए हैं। आढ़तियों के मुताबिक एक साल की लाइसेंस फीस एडवांस में मांगी जा रही है जोकि गलत है। इस दौरान प्रदेश सचिव हरीश धमीजा सब्ज़ी मंडी एसोसिएशन, धर्मपाल सैनी, मोहित ठकराल, अनील सैनी, बिट्टू पसरिजा, तिलक खुराना, सोनू पपनेजा ने सरकार के खिलाफ़ नारेबाजी की।
फीस बढ़ी तो होगी परेशानी
एक दिसंबर को सरकार की तरफ से सब्जी मंडियों में बिकने वाले फल और सब्जी पर मार्केट फीस को लेकर एकमुश्त कर लगाने की सूचना जारी हुई है। इससे पहले 2020 में एक प्रतिशत मार्केट फीस और एक प्रतिशत एचआरडीएफ लगाया गया था।
आढ़तियों का कहना है कि नई सूचना में स्लैब बनाकर एडवांस में आढ़तियों को मार्केट फीस भरने को कहा गया है। यह फैसला व्यापारियों के हित में भी नहीं है। आढ़ती तो किसानों और अंतिम उपभोक्ता के बीच की कड़ी है। हम लोग ग्राहक से दो प्रतिशत टैक्स लेकर प्रति सप्ताह सरकार को देते हैं। मौसम के अनुसार किसी वर्ष फसल कम या ज्यादा होने के कारण हमारा व्यापार प्रभावित होता है। इसलिए हम एडवांस में कैसे मार्केट फीस भर सकते हैं। अगर किसी कारणवश पारिवारिक या शारीरिक परेशानी के कारण अगर कोई आढ़ती का व्यापार प्रभावित होता है लेकिन मार्केट फीस पहले ही भर चुका होने के कारण उसको वापस लेने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ेंगे।
आढ़तियों की बढ़ी टेंशन
फिलहाल सरकार के नए फैसले के बाद अब आढ़तियों की भी टेंशन बढ़ने लगी है। हांसी सब्जी मंडी के प्रधान अनिल चावला ने बताया है कि अगर फीस में बढ़ोतरी होगी तो यह बिल्कुल भी उचित नहीं है। एक तो वैसे भी सब्जी बेचने के काम में घाटा हो रहा है क्योंकि मौसम साथ नहीं दे रहा है। दूसरी तरफ इस तरह से अगर बढ़ोतरी की जाएगी तो बिल्कुल भी स्वीकार नहीं होगा। इसे लेकर प्रदेश स्तर पर बातचीत चल रही है। आने वाले दिनों में ही कोई फैसला लिया जाएगा।