नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के गैर जाट नेताओं को शामिल कर भाजपा ने हरियाणा में गैर जाट कार्ड खेला है, हालांकि मंत्री पद की दौड़ में शामिल रतनलाल कटारिया को निराशा हाथ लगी है।
अंबाला से सांसद रतनलाल कटारिया का नाम भी मंत्री बनने की लिस्ट में चल रहा था, लेकिन वे इस दौड़ में पिछड़ गए। राव इंद्रजीत के मंत्री बनने के बाद पार्टी की अहिरवाल के क्षेत्र में पैठ बढ़ेगी।
विधानसभा चुनाव में इसका फायदा भाजपा को मिलेगा जबकि गुर्जर को हरियाणा में सर्वाधिक मतों से जीत का तोहफा मिला है।
हरियाणा में पहली बार भाजपा ने दस में से सात सीटों पर जीत हासिल की है। हालांकि राव इंद्रजीत सिंह भाजपा की लिस्ट में नया नाम था, फिर भी प्रदेश की राजनीति में उनकी वरिष्ठता को नजर अंदाज नहीं किया गया।
राव इंद्रजीत सिंह चार बार विधायक और चार बार सांसद रह चुके हैं। वे यूपीए की पहली सरकार में राज्यमंत्री भी रह चुके हैं।
राव इंद्रजीत सिंह राव तुलाराम के वंशज हैं। उनके पिता राव वीरेंद्र सिंह हरियाणा के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। लोकसभा चुनाव से काफी पहले ही उन्होंने कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थामा था।
उधर, पहली बार लोकसभा चुनाव लड़े गुर्जर ने कांग्रेस से तीन बार सांसद रहे अवतार भड़ाना को अधिकतम मतों से मात दी है।
हरियाणा से 2 नहीं 4 को मिला सरकार में प्रतिनिधित्व
मोदी मंत्रिमंडल में कहने को तो हरियाणा से दो सांसदों को जगह मिली है, लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू यह है कि हरियाणा से दो नहीं बल्कि चार नेताओं को सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। गाजियाबाद से सांसद वीके सिंह भिवानी के रहने वाले हैं और सुषमा स्वराज अंबाला की बेटी हैं।
सात में से एक जाट सांसद
हरियाणा में भाजपा के सात सांसद चुनकर आए हैं। इनमें भिवानी महेंद्रगढ़ से धर्मवीर एक मात्र जाट सांसद हैं। उन्होंने भी चुनाव से पहले कांग्रेस का दामन छोड़कर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल के गढ़ में सेंध लगाकर धर्मवीर का जीत हासिल करना भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।