फतेहाबाद। अस्पताल में पहले डॉक्टर को दिखाने और फिर सैंपल रिपोर्ट के लिए घंटों इंतजार और जब दवाई लेनी हो तो तौबा रे तौबा हो रही है। ये हालात नागरिक अस्पताल फतेहाबाद के हैं जहां पर दवाई लेने के लिए मरीजों को एक से दो घंटे तक लाइन में लगना पड़ रहा है। दवा लेने के लिए पसीने छूट रहे हैं। पसीने छूटे भी क्यों न डिस्पेंसरी में दवा वितरण के लिए एक ही फार्मेसी ऑफिसर यानी फार्मासिस्ट है। कहने को यहां पर तीन खिड़कियां हैं लेकिन दवा वितरण के लिए एक ही फार्मासिस्ट है।
दवाई देने से पहले कंप्यूटर में डाटा चढ़ाने का काम भी डिस्पेंसरी में ड्यूटी कर रही अकेली फार्मेसी ऑफिसर को देखना पड़ रहा है। ये हालात अकेले फतेहाबाद के नागरिक अस्पताल के नहीं बल्कि टोहाना, रतिया में भी है। 10 स्वास्थ्य केंद्र तो ऐसे हैं जहां पर एक भी फार्मेसी ऑफिसर नहीं है। बता दें कि नागरिक अस्पताल में फार्मेसी ऑफिसर के करीब 10 पद स्वीकृत है। यहां पर पांच कार्यरत है, एक की ड्यूटी कोर्ट की डिस्पेंसरी में है। इसके अलावा डिस्पेंसरी में दवा वितरण के लिए एक ही फार्मेसी ऑफिसर की ड्यूटी लगा रखी है। अस्पताल में रोजाना 650 से 700 मरीज आ रहे हैं। हालात ये हैं कि सुबह 9 बजे अस्पताल में दवा के लिए धुक्का-मुक्की शुरू हो जाती है जो कि दोपहर 3 बजे तक जारी रहती है। कहने को तीन खिड़कियां है लेकिन यहां पर दवा वितरण के लिए एक ही फार्मेसी ऑफिसर है। मरीज दवा लेने के लिए एक से डेढ़ घंटे तक लाइन में लगना पड़ रहा है। संवाद
10 स्वास्थ्य केंद्रों पर एक भी फार्मेसी ऑफिसर नहीं
जिले में 21 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है। यहां पर दवा वितरण के लिए कम से कम एक फार्मासिस्ट (फार्मेसी ऑफिसर) होना जरूरी है। लेकिन हालात ये है कि 10 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर फार्मेसी ऑफिसर ही नहीं है। जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भिरड़ाना, हसंगा, अहरवां, महमड़ा, एमपी रोही, हिजरावां कलां, बीघड़, नहला और कुलां में फार्मेसी ऑफिसर नहीं है।
दवा वितरण के साथ जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र का काम भी जिम्मे
फील्ड में यानी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर फार्मेसी ऑफिसर पर दवा वितरण के साथ-साथ जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र का कम भी जिम्मे है। इसके अलावा टीकाकरण को लेकर कोल्ड चेन का काम भी फार्मेसी ऑफिसर को ही दिया गया है।
कोट
जिला फतेहाबाद में फार्मेसी ऑफिसर के 46 पद स्वीकृत है जिनमें से 21 पद खाली पड़े है। जिला अस्पताल में रोजाना एक हजार मरीज आते हैं, लेकिन दवाई वितरण के लिए एक ही कर्मचारी है, बाकी से अन्य काम लिया जा रहा है। इसके चलते आमजन को परेशानी हो रही है। फील्ड में भी फार्मेसी ऑफिसर की कमी है, इसके चलते लोगों को दवाइयां, जन्म-मृत्यु के कार्य को लेकर परेशानी हो रही है। सरकार जल्द से जल्द खाली पदों को भरें।
-कृष्ण बिश्रोई, जिला प्रधान, एसोसिएशन गर्वमेंट फार्मेसी ऑफिसर
जिले में फार्मेसी ऑफिसर की कमी है। मुख्यालय से डिमांड की गई है। उम्मीद है जल्द ही जिले को फार्मेसी ऑफिसर मिल जाएंगे।
-डॉ. संगीता अबरोल, कार्यकारी सिविल सर्जन।