फतेहाबाद। जिस स्कूल में बच्चों के हाथों में किताबें और शिक्षकों के हाथों में कलम होनी चाहिए, वहां शिक्षकों को डंडे लेकर बंदरों को भगाना पड़ रहा है। सुंदर नगर स्थित राजकीय प्राइमरी स्कूल ठाकर बस्ती में रोजाना 8 से 10 बंदरों का झुंड पहुंचने से पढ़ाई और बच्चों की सुरक्षा दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
स्कूल में बाल वाटिका से पांचवीं कक्षा तक के विद्यार्थी पढ़ते हैं। छोटे बच्चों की मौजूदगी के कारण बंदरों का झुंड शिक्षकों की चिंता बढ़ा रहा है। बंदर न केवल मिड डे मील को नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि उनके बच्चों पर हमला करने और काटने का खतरा भी बना रहता है। ऐसे में शिक्षकों को बच्चों की सुरक्षा के लिए कक्षाओं के दरवाजे बंद कर कुंडी लगानी पड़ती है।
बंदरों के स्कूल परिसर में घुसने से पढ़ाई का माहौल भी प्रभावित हो रहा है। शिक्षकों को बच्चों को पढ़ाने के साथ इस बात पर भी नजर रखनी पड़ती है कि कहीं कोई बंदर कक्षा में न घुस जाए। मिड डे मील को बंदरों से बचाना भी उनके लिए चुनौती बना हुआ है। शिक्षा देने के साथ बच्चों की सुरक्षा और बंदरों को भगाने की जिम्मेदारी निभाने से शिक्षकों की परेशानी बढ़ गई है।
शिक्षकों का कहना है कि इस समस्या की शिकायत पहले भी की जा चुकी है, लेकिन समाधान नहीं हुआ। नगर परिषद की टीम बंदरों को पकड़ने के लिए स्कूल पहुंचती है तो उस समय बंदर वहां मौजूद नहीं होते। इसके चलते समस्या जस की तस बनी हुई है। संवाद
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बंदरों के कारण दो महिलाओं की टूटी टांग
शहर फतेहाबाद में यहां पर हर दूसरे दिन बंदर काटने का लोग शिकार हो रहे हैं। बंदरों के डर से दो महिलाएं छत से कूद गई थीं और दोनों की टांग टूटी थी। इसके बाद प्रशासन ने संज्ञान लेकर बंदर पकड़ने के लिए एजेंसी से अनुबंध किया था।
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नगर परिषद के पास बंदर पकड़ने के लिए अब एजेंसी नहीं
शहर फतेहाबाद में बंदर पकड़ने के लिए एजेंसी नहीं है। हालात ये है कि ठेका खत्म हो चुका है लेकिन नगर परिषद ने बंदर पकड़ने के लिए दोबारा ठेका लगाने की प्रक्रिया शुरू नहीं की है। नगर परिषद के एसआई महेश का कहना है कि ठेका लगाने की प्रक्रिया चल रही है।
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परेशानी शिक्षिका की जुबानी
सुबह साढ़े 7 बजे से बंदरों ने इतना परेशान किया हुआ है कि बच्चों को पढ़ा तक नहीं पा रहे है। डंडा लेकर उनके पीछे रहते है। बच्चों को मिड डे मील भी खिलाने में मुश्किल हो रही है। जब नगर परिषद में शिकायत करते हैं तो बंदर पकड़ने वाले आते हैं लेकिन उस समय बंदर नहीं होते हैं।
- सुनीता, शिक्षिका
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मेरे संज्ञान में नहीं है मामला
स्कूल में बंदर होने का मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। अगर स्कूल में इस तरह की समस्या है तो स्कूल को संबंधित नगर परिषद या नगर पालिका को बताना चाहिए तभी समाधान हो पाएगा।
- अनीता बाई, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी