फतेहाबाद। जिले के रेतीले क्षेत्र के किसानों के लिए सरसों की फसल में पिछले तीन वर्षों से मरगोजा खरपतवार से पैदावार में कमी आ हो रही है। इसके कारण गत वर्ष 2025 में उत्पादन 10 क्विंटल प्रति एकड़ से घटकर 6 से 7 क्विंटल रह गया।
जिले में करीब 60 हजार एकड़ में सरसों की खेती होती है। ऐसे में किसानों के लिए यह चिंता का विषय बना हुआ है। कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि विशेषज्ञ डॉ. ओमप्रकाश ने सरसों की फसल में मरगोजा के नियंत्रण के लिए किसानों को उचित उपाय अपनाने की सलाह दी है।
उन्होंने बताया कि मरगोजा (ओरोबैंकी) एक परजीवी खरपतवार है जो सरसों की फसल से पोषक तत्व ग्रहण करता है। इससे पौधों की वृद्धि और उत्पादन प्रभावित होता है। समय रहते इसका नियंत्रण नहीं किया गया तो किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
मरगोजा खरपतवार के नियंत्रण का उपाय
कृषि विज्ञान केंद्र हिसार के कृषि विशेषज्ञ डॉ. ओमप्रकाश ने इसके नियंत्रण के उपाय बताया कि रेतीली जमीन में इसका प्रकोप अधिक होता है। जिन क्षेत्र की भूमि में मरगोजा उगता है उस क्षेत्र के मरगोजा के नियंत्रण के लिए राउंडअप या ग्लाइसेल (ग्लाइफोसेट 41 प्रतिशत एसएल) का उपयोग निर्धारित मात्रा में किया जा सकता है। इसके लिए सरसों की बिजाई के 25 से 30 दिन बाद प्रति एकड़ 25 मिली लीटर तथा बिजाई के 50 दिन बाद प्रति एकड़ 50 मिलीलीटर मात्रा को 150 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। छिड़काव फ्लैट फैन नोजल और नेपसैक स्प्रेयर से ही करना है।
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सही समय और मात्रा में करें छिड़काव
कृषि विशेषज्ञ ने किसानों काे सलाह दी है कि खरपतवारनाशक का सही समय और निर्धारित मात्रा में इस्तेमाल करना जरूरी है। अधिक मात्रा में या बार-बार छिड़काव करने से सरसों की फसल को भी नुकसान पहुंच सकता है। छिड़काव के समय खेत में पर्याप्त नमी होनी चाहिए। इसके लिए छिड़काव से दो-तीन दिन पहले या बाद में सिंचाई अवश्य करें। सुबह पत्तों पर ओस या नमी होने के दौरान छिड़काव करने से भी बचें।
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फसल चक्र अपनाएं किसान
मरगोजा के दीर्घकालीन नियंत्रण के लिए फसल चक्र अपनाना चाहिए। किसान प्रभावित खेतों में सरसों के स्थान पर अन्य फसलों की खेती करें ताकि मरगोजा के प्रकोप को कम किया जा सके। उचित फसल प्रबंधन और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार उपाय अपनाकर किसान इस खरपतवार से होने वाले नुकसान को कम कर सकते हैं और सरसों की पैदावार में सुधार कर सकते हैं।